क्यों लिया गया ये फैसला?
RBI ने बैंकों के लिए IFR की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह बड़ा बदलाव 18 मई 2026 से लागू होगा। दरअसल, RBI अपनी निवेश पोर्टफोलियो और मार्केट रिस्क को मैनेज करने की गाइडलाइन्स को लगातार अपडेट कर रहा है। IFR को बैंकों के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच के तौर पर बनाया गया था, ताकि वे अपने निवेश के मूल्य में संभावित गिरावट से सुरक्षित रह सकें, खासकर उन निवेशों के लिए जिनका मूल्यांकन मौजूदा बाजार भाव (current market prices) पर किया जाता है।
IFR का पैसा कहां जाएगा?
17 मई 2026 तक IFR में जमा हुई किसी भी राशि को इसके बंद होने के बाद ट्रांसफर किया जाएगा। यह फंड स्टेट्यूटरी रिजर्व, जनरल रिजर्व या फिर प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में दर्ज किया जाएगा। विदेशी बैंकों के लिए, जो भारत में अपनी शाखाओं के जरिए काम करते हैं, IFR बैलेंस को उनके भारतीय खातों में रखे स्टेट्यूटरी रिजर्व में या फिर भारत में रिटेन किए गए प्रॉफिट में भेजा जाएगा, जिसे ब्रांच के सक्रिय रहने तक वापस नहीं भेजा जा सकता।
बाकी बैंकों के लिए क्या नियम?
को-ऑपरेटिव बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंक्स (SFBs) और पेमेंट्स बैंक्स (PBs) के लिए अलग से निर्देश जारी किए गए हैं। SFBs और PBs के लिए अंतिम नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि IFR ट्रांसफर नेट प्रॉफिट से किया जाना चाहिए, वो भी सभी अन्य जरूरी एलोकेशन के बाद। यह रेगुलेटरी अपडेट बैंकों को अपनी पूंजी और रिजर्व को मैनेज करने में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देगा, जिससे नियमों का पालन करना और कैपिटल एलोकेशन की प्लानिंग आसान हो सकती है।