RBI ने जापान के Mizuho Financial Group को Avendus Capital के अधिग्रहण के लिए हरी झंडी दे दी है। हालांकि, इस डील के लिए रिजर्व बैंक ने कंपनी के सामने एक अहम शर्त रखी है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जापान के दिग्गज फाइनेंशियल ग्रुप, Mizuho को Avendus Capital में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की सशर्त मंजूरी दे दी है। यह पूरा सौदा करीब $520 मिलियन का है, जो भारत के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में मिज़ुहो की पकड़ को और मजबूत करेगा।
RBI की क्या है शर्त?
रेगुलेटर ने मिज़ुहो को निर्देश दिया है कि वे अगले 6 महीनों के भीतर एक डिटेल्ड इंटीग्रेशन स्ट्रैटेजी पेश करें। मिज़ुहो को यह बताना होगा कि वे भारत में अपनी मौजूदा नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) होल्डिंग्स और Avendus के ऑपरेशंस को कैसे एक साथ मैनेज करेंगे। RBI का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कंपनियां भारत में अपनी ओनरशिप स्ट्रक्चर को सरल रखें और यहां के ऑपरेशंस बिखरे हुए न रहें।
डील का बैकग्राउंड
इस अधिग्रहण का ऐलान दिसंबर 2025 में हुआ था। इसके तहत मिज़ुहो सिक्योरिटीज ने Redpoint Investments (KKR की एक एफिलिएट) और अन्य शेयरधारकों से 61% से 78% तक की हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया था। अप्रैल 2026 में इसे कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया से भी मंजूरी मिल चुकी थी।
आगे क्या होगा?
इस डील के बाद भी Avendus Capital अपने मौजूदा ब्रांड नाम और लीडरशिप के साथ काम करना जारी रखेगी, जिसमें गौरव दीपक और कौशल अग्रवाल शामिल हैं। फिलहाल मार्केट की नजरें मिज़ुहो द्वारा सबमिट किए जाने वाले उस इंटीग्रेशन रोडमैप पर हैं, जिसे RBI की मंजूरी मिलनी बाकी है। यदि समय सीमा के भीतर प्लान नहीं सौंपा गया, तो अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
