RBI की मंजूरी: ₹8,850 करोड़ के निवेश का रास्ता साफ
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अबू धाबी की International Holding Company (IHC) से जुड़ी Avenir Investment RSC Ltd. को Sammaan Capital Ltd. में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल करने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय बैंक की इस हरी झंडी से Sammaan Capital Ltd. की सहायक कंपनी, Sammaan Finserve Ltd. के लिए कुछ नियामक शर्तों में छूट भी मिल गई है। इस मंजूरी के बाद Avenir ₹8,850 करोड़ का निवेश करेगी। यह निवेश प्रेफरेंशियल इश्यू (preferential issue) और वारंट्स (warrants) के जरिए होगा, जिससे Avenir की शुरुआती हिस्सेदारी करीब 41.23% हो जाएगी, और भविष्य में यह 63.36% तक पहुंच सकती है।
शेयर में तूफानी तेजी, IHC की भारत में बड़ी चाल
RBI की मंजूरी के बाद Sammaan Capital के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। NSE पर शेयर 6.6% चढ़कर ₹138.51 पर पहुंच गया, जो निफ्टी 50 (Nifty 50) के 1.8% के उछाल से कहीं बेहतर प्रदर्शन है। यह तेजी निवेशकों के उस भरोसे को दर्शाती है कि कंपनी को भारी पूंजी मिलने वाली है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। IHC, जो तेजी से विस्तार कर रही है, भारत के फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए Sammaan Capital के प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहती है। IHC खुद भी आक्रामक विस्तार कर रही है, जिसके पोर्टफोलियो का मूल्य 900 बिलियन AED (मध्य-2025 तक) से अधिक है और इसने भारतीय कंपनियों जैसे Adani Group में भी अहम निवेश किए हैं।
वैल्यूएशन और मुनाफे पर गहरी चिंताएं
हालांकि, नियामक मंजूरी के बावजूद, Sammaan Capital की असल वित्तीय तस्वीर काफी चिंताजनक है। यह कंपनी घाटे में चल रही है, जैसा कि इसके -4.15x के नेगेटिव P/E (Price-to-Earnings ratio) से जाहिर होता है। इसकी तुलना में, दूसरे नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) जैसे Bajaj Finance 28-30x P/E पर, Aavas Financiers 14-18x P/E पर और India Shelter Finance 15-17x P/E पर ट्रेड कर रही हैं। शेयर की बुक वैल्यू प्रति शेयर (book value per share) को लेकर भी विरोधाभासी रिपोर्टें हैं, जो ₹270 से लेकर ₹0.00 तक बताई जा रही हैं, जिससे इसके आंतरिक मूल्य का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है। यह निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय NBFCs का सेक्टर मजबूत है, विदेशी निवेश बढ़ रहा है और ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) घटकर 3% (FY25 तक) पर आ गए हैं। NBFC सेक्टर का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2026 तक ₹48-50 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
गवर्नेंस के दाग और 'Strong Sell' की रेटिंग
अपनी पूंजी की कमी और वैल्यूएशन की चिंताओं के अलावा, Sammaan Capital पर पुराने गवर्नेंस इश्यूज का भी भारी बोझ है। पहले Indiabulls Housing Finance (IBHFL) के नाम से जानी जाने वाली इस कंपनी पर अनियमित लोन और गवर्नेंस के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महत्वपूर्ण वित्तीय अनियमितताओं को नोट किया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं और नियामकों की आलोचना की है। ज्यादातर एनालिस्ट Sammaan Capital को 'Strong Sell' रेटिंग दे रहे हैं, और उनके प्राइस टारगेट पूंजी निवेश के बावजूद बड़ी गिरावट का संकेत देते हैं। एनालिस्ट्स की सीमित कवरेज भी भविष्य की कमाई का अनुमान लगाना कठिन बना देती है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या IHC बदल पाएगी Sammaan Capital की तस्वीर?
नियामक मंजूरी मिलने के बाद, Sammaan Capital अब IHC से बड़ी पूंजी प्राप्त करने की स्थिति में है, जो सैद्धांतिक रूप से कंपनी को एक टर्नअराउंड (turnaround) दे सकती है। हालांकि, Sammaan Capital के अतीत के गवर्नेंस की समस्याएं और इसका कमजोर वित्तीय मूल्यांकन, जैसे नेगेटिव P/E और विरोधाभासी बुक वैल्यू, बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। निवेश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि IHC कितना प्रभावी ढंग से मजबूत गवर्नेंस बदलाव ला पाती है और प्रतिस्पर्धी NBFC सेक्टर में कंपनी को लाभप्रदता की ओर ले जा पाती है। एनालिस्ट्स का नजरिया अभी भी सतर्क है, जो इस रणनीतिक वित्तीय कदम के जोखिमों को उजागर करता है।