भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए **₹30,000 करोड़** के सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) को वापस खरीदने का ऐलान किया है। यह नीलामी **3 सितंबर, 2026** को आयोजित की जाएगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्केट में अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके तहत 3 सितंबर, 2026 को चार सरकारी सिक्योरिटीज की नीलामी की जाएगी, जिसकी कुल वैल्यू ₹30,000 करोड़ तय की गई है।
नीलामी की प्रक्रिया
यह पूरी प्रक्रिया RBI के E-Kuber प्लेटफॉर्म पर 'मल्टीपल-प्राइस मेथड' के जरिए पूरी की जाएगी। इसका मतलब यह है कि सरकार अलग-अलग कीमतों पर बोलियां स्वीकार करेगी, न कि किसी एक निश्चित प्राइस पर। नीलामी सफल होने के बाद इसका सेटलमेंट 4 सितंबर, 2026 को किया जाएगा।
कौन से बॉन्ड्स शामिल हैं?
सरकार ने जिन चार सिक्योरिटीज को वापस खरीदने का फैसला लिया है, उनमें 7.33% GS 2026, 5.74% GS 2026, 8.15% GS 2026, और 8.24% GS 2027 शामिल हैं। हालांकि कुल लिमिट ₹30,000 करोड़ की है, लेकिन सरकार ने किसी एक विशेष सिक्योरिटी के लिए कोई अलग से कोटा तय नहीं किया है, ताकि मार्केट की मांग के हिसाब से लचीलापन बना रहे।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह कदम लिक्विडिटी को सिस्टम से बाहर निकालने का एक जरिया है। बॉन्ड्स वापस खरीदकर, RBI मनी सप्लाई को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के लक्ष्यों के साथ तालमेल में रखता है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि मौजूदा ब्याज दर के माहौल में सरकारी कर्ज की क्या मांग रहती है। ध्यान रहे, सरकार के पास यह अधिकार है कि वह बिना किसी विशेष कारण के किन्हीं भी ऑफर्स को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। यदि मार्केट की यील्ड उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो कुल बायबैक की रकम ₹30,000 करोड़ से कम भी हो सकती है।
