PwC India और PwC US ने अपनी कंसल्टिंग और एडवाइजरी ऑपरेशन्स को मर्ज करने का ऐलान किया है। **$2 बिलियन** के इस जॉइंट वेंचर में **40,000** प्रोफेशनल काम करेंगे और यह साल **2027** की शुरुआत तक अस्तित्व में आएगा।
बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव
इस नई इकाई का लक्ष्य भारत को केवल एक 'एग्जीक्यूशन हब' के तौर पर नहीं, बल्कि हाई-एंड स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग और AI-ड्रिवन सॉल्यूशंस के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इस मर्जर के जरिए कंपनी अपना रेवेन्यू $2 बिलियन तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
ओनरशिप और लीडरशिप
जॉइंट वेंचर में PwC US की हिस्सेदारी 50.1% और PwC India की 49.9% होगी। हालांकि, कंपनी की ऑपरेशनल बागडोर स्थानीय नेतृत्व के पास ही रहेगी। मौजूदा चेयरपर्सन संजीव कृष्ण इस नई संस्था के CEO होंगे। ध्यान रहे, यह कंसल्टिंग बिजनेस तक ही सीमित है; ऑडिट, टैक्स और डील्स एडवाइजरी का काम पहले की तरह ही इंडिपेंडेंट रहेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत में बढ़ रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और बदलती कॉर्पोरेट जरूरतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य इंटरनल साइलो को खत्म कर क्लाइंट्स को एक ही छत के नीचे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग सर्विसेज देना है।
चुनौतियां और जोखिम
इस वेंचर को 2027 की पहली छमाही तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) जैसी रेगुलेटरी बॉडीज से मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, दो अलग-अलग वर्किंग कल्चर और सिस्टम्स को जोड़ना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
