लोन में तूफानी तेजी, पर डिपॉजिट ग्रोथ धीमी
Punjab & Sind Bank के मार्च तिमाही के नतीजों में लोन (Gross Advances) में 18.39% की सालाना ग्रोथ देखी गई, जो बढ़कर ₹1.18 लाख करोड़ हो गया। वहीं, कुल डिपॉजिट 12.37% बढ़कर ₹1.46 लाख करोड़ रहा। कुल मिलाकर बैंक के बिजनेस में 14.98% की बढ़ोतरी हुई। ये आंकड़े मजबूत ओरिजिनेशन क्षमता दिखाते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपी फंड की कहानी पर ध्यान देना ज़रूरी है।
CASA Ratio में गिरावट, फंड्स हो रहे महंगे
चिंता की बात यह है कि बैंक का CASA Ratio (Current Account and Savings Account deposits) पिछले साल के 31.43% से घटकर 30.77% पर आ गया है। भले ही CASA डिपॉजिट 10.01% बढ़कर ₹44,873 करोड़ हो गए हों, लेकिन कुल डिपॉजिट में इनकी हिस्सेदारी कम हुई है। इसका सीधा मतलब है कि बैंक अब महंगे फंड्स पर ज्यादा निर्भर हो रहा है, जिससे पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) के Net Interest Margins (NIMs) पर दबाव पड़ सकता है। देश भर के बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट-डिपॉजिट गैप बढ़कर 83.0% पहुंच गया है, जो लिक्विडिटी और फंड की लागत पर लगातार दबाव का संकेत है।
साथियों से तुलना और सेक्टर का हाल
Punjab & Sind Bank की 18.39% की लोन ग्रोथ सिस्टम एवरेज (लगभग 13.5-13.8%) से काफी बेहतर है। हालांकि, वैल्यूएशन के मामले में यह कुछ साथियों से महंगा दिख रहा है। मार्च 2026 के अंत तक इसका P/E Ratio लगभग 12.06x से 15.9x के बीच रहा, जो Bank of India (7.0x), Bank of Maharashtra (7.6x), और Indian Overseas Bank (13.4x) से ज्यादा है। Central Bank of India का P/E तो सिर्फ 6.8x है। कई PSBs ने तीसरी तिमाही में अच्छी रिकवरी और एसेट क्वालिटी में सुधार के दम पर रिकॉर्ड मुनाफा कमाया था। Punjab & Sind Bank का तीसरी तिमाही का नेट प्रॉफिट भी 19% बढ़ा था।
शेयर में क्यों दिख रही नरमी?
इन मजबूत ग्रोथ फिगर्स के बावजूद, Punjab & Sind Bank का शेयर ₹21-₹23 के दायरे में अपने 52-हफ्ते के निचले स्तरों के करीब बना हुआ है। 2 अप्रैल 2026 को शेयर ₹21.78 पर बंद हुआ, जो दिन के लिए 0.25% की मामूली गिरावट थी। साल-दर-साल आधार पर शेयर में 41% से ज्यादा की बड़ी गिरावट आई है, जो Sensex की मामूली बढ़त के मुकाबले काफी खराब प्रदर्शन है। यह कमजोरी मार्केट की अस्थिरता, भू-राजनीतिक चिंताओं और बैंक की फंडिंग स्ट्रक्चर व मार्जिन पर दबाव की आशंकाओं के कारण है।
निवेशक क्यों चिंतित हैं फंडिंग लागत को लेकर?
बैंक की तेज लोन ग्रोथ ऊपरी तौर पर अच्छी लग सकती है, लेकिन इसमें जोखिम भी हैं। घटता CASA Ratio इस बात का संकेत देता है कि बैंक क्रेडिट-डिपॉजिट गैप को भरने के लिए महंगे Certificates of Deposit (CDs) या अन्य होलसेल स्रोतों पर अधिक निर्भर हो सकता है। इन महंगी फंड्स पर निर्भरता सीधे Net Interest Margins को प्रभावित कर सकती है, जो ऊंची लोन वॉल्यूम से होने वाले फायदों को कम कर सकता है। शेयर का लगातार खराब प्रदर्शन और कम कीमत, साथ ही एनालिस्टों की चिंताएं, बताती हैं कि मार्केट पहले से ही इन फंडिंग दबावों और मार्जिन की चिंताओं को भांप चुका है।
मैनेजमेंट में बदलाव और आगे की राह
बैंक ने सीनियर मैनेजमेंट नियुक्तियों की घोषणा भी की है: राजिंदर कुमार रायगर को चीफ जनरल मैनेजर और राजीव कुमार बंसल को जनरल मैनेजर नियुक्त किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है। ये नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं जब बैंक चुनौतीपूर्ण फंडिंग माहौल से गुजर रहा है। उम्मीद है कि पब्लिक सेक्टर बैंक मुनाफावसूली ग्रोथ जारी रखेंगे, लेकिन जो बैंक फंड की लागत और NIMs को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएंगे, वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। Punjab & Sind Bank पर एनालिस्ट कवरेज सीमित है, जिससे निवेशकों को रिपोर्ट की गई ग्रोथ और बढ़ती फंडिंग लागत के स्पष्ट संकेतों के बीच संतुलन बनाना होगा।