पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में एक भी लॉकर चोरी की घटना दर्ज नहीं की है। यह पिछले चार सालों में दर्ज 40 मामलों के मुकाबले एक बड़ी कामयाबी है।
बैंक लॉकर में आई बंपर सुरक्षा!
पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान, बैंकों में एक भी लॉकर चोरी की घटना सामने नहीं आई है। यह पिछले चार सालों में दर्ज किए गए 40 मामलों के मुकाबले एक बड़ी राहत है।
RBI के सख्त नियमों का असर
यह सुधार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा 2021 में लागू किए गए कड़े सुरक्षा नियमों का सीधा नतीजा है। पहले FY22 में 16 और FY23 में 17 चोरी की घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं। जैसे-जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत हुए, FY24 में 3 और FY25 में 4 मामले सामने आए, और अब FY26 में यह संख्या शून्य पर आ गई है।
ग्राहकों को मिला ज्यादा प्रोटेक्शन
देशभर में 1.1 करोड़ से ज्यादा लॉकर को सुरक्षित रखने के लिए RBI ने कई फिजिकल और डिजिटल सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए हैं। अब बैंकों को एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर CCTV लगाना होगा, जिसकी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सेव करनी होगी। इसके अलावा, जब भी कोई लॉकर खोला जाएगा, तो ग्राहकों को SMS और ईमेल के जरिए ऑटोमेटिक अलर्ट भेजा जाएगा।
बैंकों की बढ़ी जिम्मेदारी
RBI ने बैंकों की लायबिलिटी (जिम्मेदारी) भी साफ कर दी है। अब आग, चोरी या कर्मचारियों की धोखाधड़ी जैसी लापरवाही के मामलों में बैंक जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में, ग्राहक को सालाना लॉकर रेंट का 100 गुना तक मुआवजा मिल सकता है। हालांकि, भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई तब तक नहीं होगी, जब तक ग्राहक यह साबित न कर दे कि बैंक ने बिल्डिंग सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन नहीं किया था।
कहां हुईं सबसे ज्यादा चोरियां?
राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले पांच सालों में कुछ बैंक और राज्यों में चोरी की घटनाएं ज्यादा हुई थीं। बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 14-14 मामले दर्ज हुए, जबकि SBI में 10 मामले सामने आए थे। उत्तर प्रदेश और झारखंड में सबसे ज्यादा चोरियां हुईं। RBI लगातार यह सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट कर रहा है कि सभी ब्रांच सुरक्षा नियमों का पालन करें।
