सरकारी बैंकों की बल्ले-बल्ले! FY26 में ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा, डूबे कर्ज में आई भारी गिरावट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
सरकारी बैंकों की बल्ले-बल्ले! FY26 में ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा, डूबे कर्ज में आई भारी गिरावट

सरकारी बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2026 में **₹1.98 लाख करोड़** का ऐतिहासिक शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह शानदार प्रदर्शन कुल बिज़नेस में **12%** की वृद्धि और लोन की क्वालिटी में ज़बरदस्त सुधार से संभव हुआ है, जिसके चलते ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो रिकॉर्ड **1.9%** पर आ गया है।

Detailed Coverage

कैसे चमकी सरकारी बैंकों की किस्मत?

वित्त मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर के बैंक (PSBs) और रीजनल रूरल बैंक (RRBs) वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक अपने अब तक के सबसे बेहतरीन फाइनेंशियल प्रदर्शन के साथ उभरे हैं। PSBs ने ₹1.98 लाख करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस प्रॉफिट बूम के साथ ही बैंकों की एसेट क्वालिटी में भी भारी सुधार देखा गया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो, जो डूबे हुए कर्ज़ का पैमाना है, घटकर ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर 1.9% पर पहुँच गया है।

लोन बांटने में तेज़ी और फाइनेंशियल हेल्थ

बैंकों की बढ़ी हुई प्रॉफिटेबिलिटी का एक बड़ा कारण 31 मार्च 2026 तक कुल बिज़नेस में आई 12% की वृद्धि है, जो अब ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। इस दौरान, बैंकों की कुल जमा राशि ₹156.3 लाख करोड़ रही, जबकि बांटे गए कुल लोन और एडवांसेज़ ₹127 लाख करोड़ रहे। निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंकों का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR), जो जोखिम-भारित संपत्तियों के मुकाबले बैंक की पूंजी को मापता है, सुधरकर 16.6% हो गया है, जो पिछले साल 16.1% था। यह दर्शाता है कि बैंक संभावित नुकसान झेलने के लिए ज़्यादा मज़बूत स्थिति में हैं।

सेक्टर-वार क्रेडिट ट्रेंड्स

लोन देने में तेज़ी सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही। रिटेल लोन में 19.8% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, वहीं माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को दिए गए कर्ज़ में 19.6% का इजाफ़ा हुआ। एग्रीकल्चर और एलाइड एक्टिविटीज़ के लिए लोन भी 16.2% बढ़ा है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ग्रोथ थोड़ी धीमी, 4.9% रही। ये आंकड़े बताते हैं कि बैंक अपने लोन पोर्टफोलियो को सफलतापूर्वक डाइवर्सिफ़ाई कर रहे हैं, जिससे किसी एक सेक्टर पर निर्भरता कम हुई है।

रीजनल रूरल बैंक्स का प्रदर्शन

रीजनल रूरल बैंक्स (RRBs) ने भी पॉजिटिव ट्रेंड दिखाया है। FY26 के लिए उनका कन्सॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹10,177 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। उनकी कुल जमा राशि ₹7.69 लाख करोड़ और आउटस्टैंडिंग लोन ₹5.78 लाख करोड़ रहे। 75.2% के क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो और 15% के कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो के साथ, इन बैंकों ने अपनी फाइनेंशियल पोजीशन को सुधारा है। हालांकि, उनका GNPA रेशियो अभी भी बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकिंग स्पेस की तुलना में ज़्यादा, 5.3% पर बना हुआ है।

सरकारी सपोर्ट और आगे की राह

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के संभावित आर्थिक दबाव से निपटने के लिए, सरकार ने मई 2026 में इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 पेश की है। इस स्कीम का मक़सद MSMEs और अन्य योग्य व्यवसायों के लिए गारंटी कवर प्रदान करना है, ताकि ₹2.55 लाख करोड़ तक का क्रेडिट फ्लो बना रहे। निवेशकों के लिए, अगली बड़ी अपडेट यह होगी कि ये बैंक आने वाली तिमाहियों में अपनी एसेट क्वालिटी कैसे बनाए रखते हैं, खासकर जब वे रिटेल और MSME सेगमेंट में अपना एक्सपोजर बढ़ा रहे हैं। मुनाफे में इस ग्रोथ की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये लोन सेगमेंट डिफॉल्ट में बढ़ोतरी देखे बिना अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.