देश के सरकारी बैंक (Public Banks) अपने ATM नेटवर्क को अपग्रेड करने जा रहे हैं। पुराने कैश डिस्पेंसर वाली मशीनों की जगह अब नई 'कैश रीसाइक्लर' मशीनें लगाई जाएंगी। यह कदम छोटे शहरों में नकदी की कमी को दूर करने और बैंक के खर्चों को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।
कैश की किल्लत होगी खत्म, बैंक करेंगे मोटी बचत
पब्लिक सेक्टर के बैंक (PSBs) अपने ATM नेटवर्क में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में हैं। अब पुराने कैश निकालने वाली मशीनों (ATM) की जगह नई 'कैश रीसाइक्लर' मशीनें लगाई जाएंगी। इस बड़े बदलाव का मुख्य मकसद टियर-2 और टियर-3 शहरों में नकदी (Cash) की कमी की समस्या को खत्म करना है। पुरानी मशीनों में अक्सर खराबी आ जाती थी और उन्हें बार-बार कैश से भरना पड़ता था, जिससे समस्या बढ़ती थी। अब करीब 15,000 ऐसी मशीनों को बदला जाएगा, और सरकारी बैंक इस खरीदारी में आगे रहेंगे।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लागत में कमी
ये नई 'कैश रीसाइक्लर' मशीनें सिर्फ पैसे निकालने का ही नहीं, बल्कि जमा करने का भी काम करेंगी। इसका मतलब है कि ग्राहक जो पैसा जमा करेंगे, वही मशीन दूसरों को निकालने के लिए इस्तेमाल कर पाएगी। इससे बैंकों के लिए यह एक बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। बार-बार कैश लोड करने की जो झंझट भरी और महंगी प्रक्रिया है, उसमें कमी आएगी। बैंक उम्मीद कर रहे हैं कि इससे मशीनों का अपटाइम (Uptime) बढ़ेगा और कुल मिलाकर ऑपरेशनल खर्च (Operational Expenses) कम होंगे। डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद, छोटे बाजारों में कैश की डिमांड अभी भी बनी हुई है, और बैंक इसी को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
आउटसोर्सिंग और थर्ड-पार्टी पार्टनरशिप पर जोर
इस बदलाव का एक अहम हिस्सा आउटसोर्सिंग (Outsourcing) को बढ़ावा देना है। अभी तक सरकारी बैंकों का बड़ा ATM नेटवर्क खुद ही मैनेज होता है। करीब 90,000 ऑन-साइट ATM आज भी PSBs सीधे चला रहे हैं। ऐसे में, बैंकों पर दबाव है कि वे इन जिम्मेदारियों को स्पेशलाइज्ड मैनेज्ड सर्विस प्रोवाइडर्स (Managed Service Providers) को सौंपें। बढ़ती कर्मचारियों की लागत और नई मशीनों के रखरखाव की तकनीकी जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। थर्ड-पार्टी फर्मों के साथ पार्टनरशिप करके, बैंक गैर-जरूरी कामों से छुटकारा पा सकते हैं और अपने मुख्य लेंडिंग बिजनेस पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, साथ ही अपने पार्टनर्स की टेक्नोलॉजी और मेंटेनेंस की विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं।
ATM इंफ्रास्ट्रक्चर का मार्केट आउटलुक
भारत में ATM की कुल संख्या लगातार बढ़ रही है। इंडस्ट्री के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, यह संख्या करीब 2,46,000 यूनिट तक पहुंच गई है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के 2,21,000 यूनिट से ज्यादा है। अनुमान है कि 2029-30 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 2,75,000 यूनिट हो जाएगी। हालांकि, इस नेटवर्क की बनावट तेजी से बदल रही है। थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स द्वारा मैनेज किए जाने वाले ATM की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह संख्या 2025 के अंत तक 1,20,000 यूनिट से बढ़कर दशक के अंत तक 1,70,000 यूनिट तक पहुंच सकती है। निवेशकों और मार्केट के जानकारों के लिए, अब पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) और बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) जैसे बैंकों से आने वाले रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल्स (RFPs) की टाइमलाइन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, यह देखना भी जरूरी होगा कि इस कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) का उनके ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) और सर्विस पार्टनर्स की ग्रोथ पर क्या असर पड़ता है।
