UPI Charges: डिजिटल पेमेंट पर शुल्क की आहट, छोटे दुकानदार फिर कैश की ओर?

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AuthorMehul Desai|Published at:
UPI Charges: डिजिटल पेमेंट पर शुल्क की आहट, छोटे दुकानदार फिर कैश की ओर?

Indian School of Business की एक नई रिपोर्ट ने डिजिटल पेमेंट सेक्टर में हलचल मचा दी है। प्रस्तावित **0.4%** UPI ट्रांजेक्शन शुल्क से छोटे वेंडर्स के कैश की ओर लौटने का खतरा पैदा हो गया है, जो फिनटेक कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

नीति का 'डार्क साइड'

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) की ताजा स्टडी ने पेमेंट इकोसिस्टम के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सरकार की योजना ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की है। हालांकि नियम में उन दुकानदारों को छूट दी गई है जिनकी मंथली डिजिटल कमाई ₹1 लाख से कम है, लेकिन स्टडी बताती है कि इसका 'स्ट्रक्चरल ब्लाइंड स्पॉट' छोटे व्यापारियों को भारी पड़ सकता है।

क्यों कैश वापस आ सकता है?

रिसर्च के मुताबिक, लगभग 70% स्ट्रीट वेंडर्स अपने सप्लायर को ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान करते हैं। चूंकि ये पेमेंट 'प्रोक्योरमेंट' (सामान खरीदने) के दायरे में आते हैं और इन पर कोई छूट नहीं मिलेगी, इसलिए दुकानदारों के लिए डिजिटल पेमेंट महंगा हो जाएगा। अपने मुनाफे को बचाने के लिए वे फिर से कैश का रास्ता अपना सकते हैं।

मार्केट सेंटिमेंट और डर

आंकड़े चौंकाने वाले हैं; देश भर के 45% से 53% वेंडर्स ने संकेत दिया है कि अगर ये चार्ज लागू हुए, तो वे UPI लेना बंद कर सकते हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में तो पहले से ही कन्फ्यूजन का माहौल है, जहां दुकानदार हर आने वाले पेमेंट पर टैक्स कटने का डर पाल बैठे हैं।

फिनटेक निवेशकों के लिए चेतावनी

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारी विरोध के बाद इस रोलआउट को फिलहाल टाला है। हालांकि, फिनटेक कंपनियों के लिए यह अनिश्चितता जारी है। अगर छोटे मर्चेंट्स ने डिजिटल पेमेंट से दूरी बनाई, तो इन कंपनियों के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिसका असर उनके स्टॉक पर पड़ना तय है। अब सभी की निगाहें NPCI की फाइनल गाइडलाइंस पर टिकी हैं कि क्या सरकार प्रोक्योरमेंट पेमेंट्स के लिए कोई राहत लेकर आती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.