InvITs का होगा पब्लिक डेब्यू, मार्च 2027 तक प्राइवेट ट्रस्ट्स शेयर बाजार में उतरने को तैयार

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AuthorMehul Desai|Published at:
InvITs का होगा पब्लिक डेब्यू, मार्च 2027 तक प्राइवेट ट्रस्ट्स शेयर बाजार में उतरने को तैयार

Bharat InvITs Association (BIA) अब प्राइवेट ट्रस्ट्स को पब्लिक एक्सचेंज पर लिस्ट करने की योजना बना रही है। मार्च 2027 तक होने वाले इस बदलाव से रिटेल निवेशकों के लिए पारदर्शिता और लिक्विडिटी बढ़ेगी, जबकि सेक्टर ने पहले ही पहली तिमाही में **₹5,923 करोड़** का बंपर डिस्ट्रीब्यूशन किया है।

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। Bharat InvITs Association (BIA) अब करीब 4 से 5 प्राइवेटली प्लेस्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) को मार्च 2027 तक पब्लिक स्टॉक एक्सचेंज पर लाने की तैयारी कर रही है। इस कदम से ये ट्रस्ट्स अब आम रिटेल निवेशकों के लिए भी उपलब्ध हो सकेंगे।

पब्लिक एक्सेस का दायरा बढ़ेगा

फिलहाल भारत में 28 रजिस्टर्ड InvITs हैं, जिनमें से केवल 9 ही पब्लिक एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं। पब्लिक लिस्टिंग के पीछे मुख्य मकसद पारदर्शिता और रेगुलेटरी कम्प्लायंस को बेहतर बनाना है। इससे मार्केट में लिक्विडिटी आएगी, जिससे निवेशकों के लिए यूनिट्स की खरीद-फरोख्त आसान हो जाएगी। रिटेल निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका सबूत यह है कि जून 2026 के अंत तक यूनिट होल्डर्स की संख्या 6.53 लाख पहुंच गई है, जो पिछली तिमाही में 5.58 लाख थी।

Cube Highways Trust, Altius Telecom Infrastructure Trust, और NDR InvIT Trust जैसे बड़े नाम इस दिशा में सक्रिय दिख रहे हैं।

कमाई का जरिया और यील्ड

निवेशक InvITs को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि ये टोल कलेक्शन, रेंट या यूसेज फीस के जरिए रेगुलर कैश फ्लो देते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में इस सेक्टर ने ₹5,923 करोड़ का डिस्ट्रीब्यूशन किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 15% अधिक है। कई ट्रस्ट्स 9% तक का डिस्ट्रीब्यूशन यील्ड ऑफर कर रहे हैं, जो फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

क्या हैं जोखिम?

पब्लिक लिस्टिंग और रेगुलर कमाई के बीच निवेशकों को रिस्क को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। InvITs पर ब्याज दरों (Interest rates) का सीधा असर पड़ता है। जब मार्केट में दरें बढ़ती हैं, तो इनके फिक्स्ड-इनकम जैसे यील्ड्स का आकर्षण कम हो जाता है, जिससे यूनिट्स के दाम पर दबाव बन सकता है। इसके अलावा, इनका मुनाफा टोल ट्रैफिक और सरकारी नियमों पर निर्भर करता है। लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स होने के कारण, इनमें फ्लेक्सिबिलिटी कम होती है, इसलिए निवेशकों को पब्लिक मार्केट की वॉलेटिलिटी के लिए भी तैयार रहना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.