LIC को पछाड़कर प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की बंपर कमाई! Q1 में प्रीमियम ग्रोथ में मारी बाजी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
LIC को पछाड़कर प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की बंपर कमाई! Q1 में प्रीमियम ग्रोथ में मारी बाजी

भारत के लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत दमदार की है। Q1 FY27 में नए बिजनेस प्रीमियम (NBP) में **16.6%** की शानदार बढ़ोतरी हुई, जो कुल **₹1.09 लाख करोड़** तक पहुंच गया। प्राइवेट इंश्योरर्स ने **27.5%** की ग्रोथ दर्ज की, जो LIC के **10.3%** ग्रोथ से काफी ज्यादा है।

प्राइवेट इंश्योरर्स की चांदी, LIC पीछे!

लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में नए बिजनेस प्रीमियम (NBP) में 16.6% का इजाफा हुआ और यह ₹1.09 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस तिमाही की सबसे बड़ी कहानी यह है कि बाजार में प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इन कंपनियों ने 27.5% की जोरदार ग्रोथ के साथ ₹43,522 करोड़ का प्रीमियम इकट्ठा किया। यह उछाल ग्रुप इंश्योरेंस सेगमेंट के मजबूत प्रदर्शन और रेगुलर प्रीमियम व प्रोटेक्शन-लिंक्ड प्रोडक्ट्स की लगातार मांग के कारण संभव हुआ।

वहीं, सरकारी दिग्गज Life Insurance Corporation of India (LIC) की ग्रोथ 10.3% रही और इसने ₹65,548 करोड़ का प्रीमियम जमा किया।

हालांकि प्राइवेट कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं, LIC अभी भी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और इंडस्ट्री के कुल प्रीमियम का लगभग 60% हिस्सा नियंत्रित करती है। LIC के रिटेल बिजनेस ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जहां रेगुलर प्रीमियम कलेक्शन में लगभग 20% की बढ़ोतरी देखी गई।

लिस्टेड कंपनियों का प्रदर्शन

पब्लिकली लिस्टेड इंश्योरर्स में, SBI Life Insurance ने 22.6% की बढ़ोतरी के साथ ₹8,905 करोड़ के NBP के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। ICICI Prudential Life Insurance ने भी 21.3% ग्रोथ के साथ ₹4,866 करोड़ का आंकड़ा छुआ। HDFC Life Insurance ने 12.6% की बढ़ोतरी के साथ ₹8,432 करोड़ जुटाए, जबकि Axis Max Life Insurance ने 17.5% बढ़कर ₹2,964 करोड़ का कलेक्शन किया। यह आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनियों की ग्रोथ स्ट्रेटेजी अलग-अलग हैं, कुछ ग्रुप बिजनेस से ज्यादा फायदा उठा रही हैं तो कुछ इंडिविजुअल इंश्योरेंस सेगमेंट में अच्छा कर रही हैं।

रेगुलेटरी बदलावों पर नजर

यह प्रीमियम कलेक्शन तब हो रहा है जब इंडस्ट्री बड़े रेगुलेटरी बदलावों के लिए तैयार है। इंश्योरर्स अगले दो सालों में लागू होने वाले अकाउंटिंग और कैपिटल एडिक्वेसी फ्रेमवर्क के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को एडजस्ट कर रहे हैं। इन बदलावों का मकसद सेक्टर में पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को बढ़ाना है।

निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये कंपनियां ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे संतुलित करती हैं। प्रीमियम ग्रोथ एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन मार्जिन की स्थिरता प्रोडक्ट मिक्स पर निर्भर करेगी - खासकर हाई-मार्जिन प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स और लो-मार्जिन ग्रुप पॉलिसियों के बीच। इसके अलावा, इंडस्ट्री यह भी देख रही है कि ये रेगुलेटरी एडजस्टमेंट निकट भविष्य में कैपिटल रिक्वायरमेंट्स और कैश फ्लो को कैसे प्रभावित करेंगे। निवेशकों को आगामी तिमाही कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए, जिसमें एक्सपेंस रेशियो और पर्सिस्टेंसी जैसे फैक्टर्स शामिल हैं, जो सीधे लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित करते हैं।

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