बड़ी डील में विदेशी फंड्स की एंट्री
25 मई, 2026 को Premier Energies की प्रमोटर कंपनियों ने 5.3% हिस्सेदारी एक ब्लॉक डील के ज़रिए ₹2,413 करोड़ में बेच दी। शेयर ₹955 प्रति शेयर के भाव पर बेचे गए। इस ट्रांज़ैक्शन में Quant Mutual Fund, Nomura India Investment Fund और Smallcap World Fund जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई।
खास बात यह रही कि इतनी बड़ी बिकवाली के बावजूद, बाजार में शेयर की कीमत 3% बढ़कर ₹1,005.10 पर पहुंच गई। इससे पता चलता है कि खरीदारों की मांग इतनी मजबूत थी कि बिकवाली का दबाव शेयर पर नहीं पड़ा।
फाइनेंशियल सेक्टर में भी हलचल
Premier Energies की डील के अलावा, फाइनेंशियल सेक्टर में भी कई अहम घटनाएं हुईं। JM Financial ने अपना दूसरा प्राइवेट क्रेडिट फंड लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य भारतीय मिड-कैप कंपनियों के लिए कैपिटल जुटाना है। यह दिखाता है कि पारंपरिक लोन के रास्ते टाइट होने के बीच प्राइवेट क्रेडिट एक अहम सोर्स बनता जा रहा है। वहीं, SEBI ने BSE और CDSL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को मंजूरी देकर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में गवर्नेंस को मजबूत किया है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के रिस्क
सरकार की सब्सिडी और एक्सपोर्ट की संभावनाओं के बावजूद, सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। कंपनियों को पॉलिसी बदलावों, जमीन अधिग्रहण की दिक्कतों और कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स का सामना करना पड़ता है। Premier Energies के लिए, सोलर सेल प्रोडक्शन में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा मार्जिन को कम कर सकती है। हालांकि कंपनी का डेट-टू-EBITDA रेश्यो स्टेबल है, लेकिन सेक्टर की वोलेटिलिटी और सब्सिडी पर निर्भरता लंबे समय में रिस्क पैदा कर सकती है। निवेशकों को उन कंपनियों से सावधान रहना चाहिए जिनके पास मजबूत टेक्नोलॉजिकल एडवांटेज नहीं है, क्योंकि नई मॉड्यूल टेक्नोलॉजी के कारण प्राइसिंग पावर पर असर पड़ रहा है।
मार्केट आउटलुक और एनालिस्ट की राय
एनालिस्ट्स Premier Energies को लेकर सतर्कता से पॉजिटिव हैं और आगे की चाल के लिए Q1 FY27 के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। शेयर फिलहाल एक रेंज में ट्रेड कर रहा है, और ₹1,050 का लेवल एक अहम रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है। संस्थागत निवेशकों की बढ़ती मौजूदगी यह संकेत देती है कि अब फोकस सिर्फ कैपेसिटी बढ़ाने पर नहीं, बल्कि लगातार अर्निंग ग्रोथ पर भी है। कंपनी की हैदराबाद फैसिलिटी में हाई यूटिलाइजेशन बनाए रखने की क्षमता और एक्सपोर्ट से जुड़े करेंसी रिस्क को मैनेज करना, भविष्य के परफॉरमेंस के लिए महत्वपूर्ण होगा।
