मैनेजमेंट में बड़ा फेरबदल
Poonawalla Fincorp के शेयर में तेजी की उम्मीदें मैनेजमेंट में किए जा रहे बड़े बदलावों पर टिकी हैं। कंपनी ने HDFC Bank के पुराने दिग्गज अरविंद कपिल को नया लीडर बनाया है। यह कदम HDFC Bank के रिटेल बैंकिंग मॉडल को अपनाने की ओर इशारा करता है। HDFC इकोसिस्टम से जुड़े लोगों को लाने का मकसद कंपनी के बिजनेस मॉडल को बदलना है। अब कंपनी ज्यादा रिस्की, हाई-इंटरेस्ट वाले लोन सेगमेंट से हटकर प्राइम और डायवर्सिफाइड रिटेल पोर्टफोलियो पर फोकस करेगी।
लोन बुक को बढ़ाना
Poonawalla Fincorp गोल्ड लोन, कमर्शियल व्हीकल और एजुकेशन फाइनेंस जैसे नए सेगमेंट्स में तेजी से कदम रख रही है। इन नए प्रोडक्ट्स का कंपनी के कुल लोन बुक (AUM) में हिस्सा अभी 14% है, जिसे 2029 तक बढ़ाकर 34% करने का लक्ष्य है। इस स्ट्रेटेजी से कंपनी का AUM 33% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस सेक्टर में पहले से मौजूद बड़ी NBFCs और पब्लिक सेक्टर बैंकों से मुकाबला करना आसान नहीं होगा।
जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को अच्छी संभावनाओं के साथ कुछ बड़े जोखिमों पर भी गौर करना चाहिए। कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह तेजी से बिजनेस बढ़ाने के साथ-साथ क्रेडिट कॉस्ट को कैसे कंट्रोल करती है। कई बार नए सेगमेंट्स में तेजी से ग्रोथ करने पर 18-24 महीने बाद खराब लोन (Delinquency) के मामले सामने आते हैं। कंपनी का कहना है कि अभी GNPA रेश्यो 1.4% है, जो पिछले खराब लोन को हटाकर बेहतर हुआ है। लेकिन, अगर नए लोन, खासकर पर्सनल लोन वाले, मैक्रो इकोनॉमिक दबाव में कमजोर साबित हुए तो मार्जिन में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी।
आगे की राह
बाजार की नजर अब आने वाली तिमाही नतीजों पर रहेगी कि क्या 'HDFC-स्टाइल' अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स से सस्टेनेबल यील्ड मिल पा रही है। कंपनी ने रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) के लिए 16% का लक्ष्य रखा है, जो इसे एक ग्रोथ-ओरिएंटेड कंपनी के रूप में स्थापित करेगा। लेकिन, जब तक नया प्रोडक्ट मिक्स AUM में बड़ा हिस्सा नहीं बना लेता, तब तक शेयरधारकों के लिए कमाई में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
