Polymarket अब यूरोपीय रेगुलेटर्स पर दबाव बना रही है कि उसके प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म को 'जंबलिंग' साइट के बजाय 'डेरिवेटिव मार्केट' का दर्जा दिया जाए। इस कदम का मकसद फ्रांस और इटली जैसे देशों में लगे प्रतिबंधों को हटाना है। **$21 बिलियन** की वैल्यूएशन वाली इस कंपनी पर रिटेल निवेशकों की सुरक्षा और मार्केट मैनिपुलेशन को लेकर भारी दबाव है।
कानूनी दर्जा बदलने की कवायद
Polymarket ने यूरोप के प्रमुख रेगुलेटर्स जैसे European Securities and Markets Authority (ESMA) और UK की Financial Conduct Authority (FCA) के साथ एक मुहिम शुरू की है। कंपनी का लक्ष्य अपने प्लेटफॉर्म को एक वित्तीय डेरिवेटिव मार्केट के रूप में स्थापित करना है, ताकि वे उन प्रतिबंधों से बच सकें जो वर्तमान में फ्रांस, इटली और ब्राजील जैसे देशों में उसके कामकाज को रोके हुए हैं।
क्यों संशय में हैं रेगुलेटर्स?
सालों से प्रेडिक्शन मार्केट नवाचार और सट्टेबाजी के बीच के 'ग्रे एरिया' में फंसा हुआ है। कंपनी बाइनरी ऑप्शंस जैसे फाइनेंशियल फ्रेमवर्क के तहत काम करना चाहती है, लेकिन यूरोपीय अधिकारियों को डर है कि यह हाई-रिस्क प्लेटफॉर्म रिटेल निवेशकों के लिए खतरनाक हो सकता है। साथ ही, इन पर मार्केट मैनिपुलेशन और इनसाइडर ट्रेडिंग के गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं।
फाइनेंशियल पारदर्शिता का मुद्दा
कारोबारी नजरिए से देखें तो Polymarket एक प्राइवेट कंपनी है और यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। 1789 Capital की फंडिंग के बाद इसकी पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब $21 बिलियन आंकी गई है। हालांकि, पब्लिक कंपनियों के उलट, इस कंपनी के पास उतनी फाइनेंशियल पारदर्शिता नहीं है, जिससे बाहरी निवेशकों के लिए इसके रेवेन्यू या कर्ज की स्थिति को समझना काफी मुश्किल है।
आगे की राह काफी चुनौतीपूर्ण है। भले ही कंपनी को कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मंजूरी मिल जाए, लेकिन प्लेटफॉर्म पर मौजूद स्पोर्ट्स और पॉलिटिकल वेटिंग (Wagering) का भारी वॉल्यूम इस दावे को कमजोर बनाता है। फिलहाल, पूरी दुनिया के मार्केट ऑब्जर्वर्स की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यूरोपीय रेगुलेटर्स इस री-क्लासिफिकेशन को स्वीकार करेंगे या प्रतिबंधों का दौर जारी रहेगा।
