Piramal Finance के शेयर में शुक्रवार को **4.83%** की गिरावट दर्ज की गई और यह **₹2,080.90** पर आ गया। कंपनी ने हाल ही में अपनी पहली तिमाही के नतीजे पेश किए थे, जिसमें नेट इंटरेस्ट इनकम में **43%** का शानदार उछाल देखने को मिला था। रिटेल एसेट्स में मजबूत ग्रोथ के बावजूद, निवेशकों ने मुनाफावसूली (profit-booking) की। कंपनी ने भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए **₹4,000 करोड़** जुटाने की योजना का भी ऐलान किया है।
नतीजों के बाद शेयर में क्यों आई गिरावट?
शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर Piramal Finance लिमिटेड के शेयर 4.83% टूटकर ₹2,080.90 के स्तर पर कारोबार करते दिखे। ट्रेडिंग वॉल्यूम का 78% से अधिक बिकवाली का था। यह गिरावट कंपनी के पहली तिमाही के नतीजों के तुरंत बाद आई, जिसमें टॉप-लाइन और एसेट्स में मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई थी।
मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और एसेट ग्रोथ
कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में सालाना आधार पर 25% का इजाफा हुआ और यह ₹1,06,940 करोड़ तक पहुंच गया। रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) इस ग्रोथ का मुख्य जरिया रही, जिसके रिटेल एसेट्स 32% बढ़कर ₹91,249 करोड़ हो गए। मुनाफे की बात करें तो कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 43% बढ़ी। ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार दिखा, क्योंकि कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो घटकर 52.5% रह गया, जो पिछले साल 65.6% था। इन शानदार आंकड़ों के बावजूद, शेयर जुलाई में दर्ज किए गए अपने 52-हफ्ते के हाई ₹2,220 से नीचे आ गया।
एनालिस्ट्स की राय: वैल्यूएशन और रिटर्न रेश्यो पर चिंता
बाजार के जानकारों की राय बंटी हुई है। Motilal Oswal, Nomura और JM Financial जैसे कई ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के मजबूत एग्जीक्यूशन और प्रॉफिट ग्रोथ के अनुमानों के चलते पॉजिटिव रेटिंग बनाए रखी है। वहीं, कुछ एनालिस्ट्स ने वैल्यूएशन और कैपिटल एफिशिएंसी (capital efficiency) को लेकर चिंता जताई है। Jefferies, जिसने न्यूट्रल (neutral) व्यू रखा है, का कहना है कि शेयर का बुक वैल्यू (book value) के मुकाबले मौजूदा स्तर भविष्य में बड़े गेन को सीमित कर सकता है, खासकर जब कंपनी का एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) फाइनेंशियल ईयर 2029 तक 12% से नीचे रहने का अनुमान है। HDFC Securities ने भी सावधानी बरतते हुए कहा है कि कंपनी के मौजूदा बॉरोइंग (borrowings) का इस्तेमाल नियर टर्म में RoE पर असर डाल सकता है।
एसेट क्वालिटी और भविष्य की फंडिंग
एसेट क्वालिटी (Asset Quality) स्थिर दिख रही है, जिसमें ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 2.4% दर्ज किए गए हैं। दक्षिण भारत में सैलरीड IT कर्मचारियों के बीच कुछ मॉर्गेज पेमेंट में देरी देखी गई, लेकिन मैनेजमेंट का कहना है कि यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। भविष्य की बात करें तो, कंपनी के बोर्ड ने ₹4,000 करोड़ तक फंड जुटाने की मंजूरी दे दी है। इस पैसे का इस्तेमाल भविष्य की ग्रोथ के लिए किया जाएगा, हालांकि इसकी असल टाइमिंग शेयरहोल्डर की मंजूरी और मार्केट कंडीशंस पर निर्भर करेगी। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि यह कैपिटल कैसे इस्तेमाल होता है और कंपनी आने वाली तिमाहियों में अपने रिटेल एसेट ग्रोथ को बनाए रखते हुए रिटर्न ऑन इक्विटी में सुधार कर पाती है या नहीं।
