Piramal Finance: GIFT City से ₹3300 करोड़ की बंपर विदेशी फंडिंग! जानिए क्या है इस डील में खास

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AuthorNeha Patil|Published at:
Piramal Finance: GIFT City से ₹3300 करोड़ की बंपर विदेशी फंडिंग! जानिए क्या है इस डील में खास
Overview

Piramal Finance ने **$400 मिलियन** (लगभग **₹3320 करोड़**) की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) फैसिलिटी का ऐलान किया है। यह बड़ी फंडिंग **GIFT City** के ज़रिए **Deutsche Bank AG** और **Sumitomo Mitsui Banking Corp.** जैसे लेंडर्स के कंसोर्टियम से हासिल हुई है, जिसका मकसद कंपनी की फंड जुटाने की क्षमता को और मज़बूत करना है।

Piramal Finance की फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा कदम

Piramal Finance ने अपनी फाइनेंसिंग रणनीति में एक बड़ा कदम उठाते हुए $400 मिलियन (लगभग ₹3320 करोड़) की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) हासिल की है। यह फंड Deutsche Bank AG और Sumitomo Mitsui Banking Corp. सहित ग्लोबल और डोमेस्टिक लेंडर्स के एक बड़े कंसोर्टियम से मिला है। इस ट्रांजेक्शन का मुख्य उद्देश्य कंपनी के लिए फंड जुटाने के सोर्स को डायवर्सिफाई करना और देश के अंदरूनी इलाकों (hinterland) में एक्सपेंशन के लिए किफायती पूंजी हासिल करना है। यह डील लगभग SOFR+175 बेसिस पॉइंट्स की दर से की गई है।

क्यों अहम है यह विदेशी फंडिंग?

यह $400 मिलियन की ECB, Piramal Finance की इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट्स से फंड जुटाने की प्रो-एक्टिव स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले दो से तीन सालों में अपने कुल बॉरोइंग का 18-20% हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट्स से जुटाना है। यह कदम इसलिए भी बहुत ज़रूरी हो जाता है क्योंकि भारतीय नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनीज़ (NBFCs) इस समय बढ़ी हुई बॉरोइंग कॉस्ट और बैंक से लोन मिलने में सुस्ती जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी Fitch के मुताबिक, 2025 तक NBFCs की बॉरोइंग कॉस्ट ऊंची रहने की उम्मीद है, और उम्मीद है कि पॉलिसी रेट में कटौती का पूरा फायदा इन कंपनियों को नहीं मिलेगा। ऐसे में, Piramal Finance के लिए यह विदेशी फंडिंग, लोन के महंगे घरेलू सोर्स पर निर्भरता कम करने और अपनी वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने में मदद करेगी। यह भी गौर करने वाली बात है कि बैंकों द्वारा NBFCs को दिया जाने वाला लोन पिछले कुछ समय में काफी धीमा हुआ है, जो FY23 में 32% की ग्रोथ से घटकर अगस्त 2024 तक सिर्फ 14% रह गया था।

GIFT City: ग्लोबल कैपिटल के लिए एक मज़बूत गेटवे

इस पूरी ट्रांजेक्शन में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) की भूमिका बेहद अहम रही। फंडर्स के एक बड़े हिस्से ने GIFT City के ज़रिए ही पार्टिसिपेट किया, जिसने अपनी फाइनेंसियल इंफ्रास्ट्रक्चर और टैक्स-एफिशिएंट माहौल का फायदा उठाया। GIFT City Piramal Finance जैसी कंपनियों के लिए फॉरेन करेंसी डेट जुटाने का एक स्ट्रीमलाइंड प्रोसेस ऑफर करती है, जो शायद डोमेस्टिक बोर्रॉइंग से ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। Deutsche Bank के इंडिया फाइनेंसिंग हेड ने भी इस डील की कामयाबी को भारतीय NBFC क्रेडिट के लिए इंटरनेशनल डिमांड और GIFT City के बढ़ते महत्व के तौर पर रेखांकित किया है।

एनालिटिकल डीप डाइव और पीयर कंपेरिज़न

Piramal Finance की पैरेंट कंपनी, Piramal Enterprises Ltd., की मार्केट कैपिटलाइजेशन इस समय करीब ₹25,483 करोड़ से ₹26,113 करोड़ के बीच है। इसका Trailing Twelve Months (TTM) P/E रेश्यो 43.54 से 49.0 के बीच है, जो इंडस्ट्री के एवरेज P/E 29.23 से काफी ज्यादा है। यह हायर वैल्यूएशन दर्शाता है कि इन्वेस्टर्स कंपनी की ग्रोथ पोटेंशियल को काफी उम्मीद से देख रहे हैं। वहीं, Bajaj Finance और Shriram Finance जैसे कॉम्पिटिटर्स के वैल्यूएशन मल्टीपल्स अक्सर अलग होते हैं, जो उनके रिस्क प्रोफाइल और ग्रोथ को दर्शाते हैं। Piramal Finance ने जून 2025 में ही ₹2,950 करोड़ के डोमेस्टिक बॉन्ड 9.25% तक के कूपन रेट पर जारी किए थे। यह ECB इश्यूऐंस, डोमेस्टिक मार्केट के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट से भी फंड जुटाने की स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा है, जो फंड जुटाने के अलग-अलग रास्ते खोलता है। सितंबर 2024 तक, Piramal Finance का बोर्रॉइंग मिक्स 41% NCDs, 29% बैंक लोन, 14% सिक्योरिटाइजेशन, 9% CP और 5% ECB से आता था।

संभावित जोखिम और एनालिस्ट्स की राय

हालांकि, इस फंडरेज़िंग की स्ट्रेटेजिक कामयाबी के बावजूद, कुछ संभावित जोखिमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। Piramal Enterprises का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) अब तक मामूली रहा है, जो करीब 1.63% से 1.80% के आसपास है, जो इंडस्ट्री के कई खिलाड़ियों से काफी कम है। CLSA और Citi जैसे एनालिस्ट्स ने भी मिली-जुली राय दी है, कुछ 'Sell' रेटिंग और प्राइस टारगेट के साथ जो संभावित डाउनसाइड रिस्क की ओर इशारा करते हैं। MSME और छोटे टिकट साइज वाले 'Loan Against Property' (LAP) जैसे कुछ लोन सेगमेंट्स में उभरते स्ट्रेस और पुराने होलसेल बुक पर संभावित हेयरकट को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। कंपनी का मजबूत कैपिटलाइजेशन एक बफर प्रदान करता है, लेकिन इंडस्ट्री एवरेज से काफी ऊपर का P/E रेश्यो तब वैल्यूएशन रिस्क पैदा कर सकता है जब ग्रोथ की उम्मीदें पूरी न हों।

भविष्य की राह

Piramal Finance के MD, Jairam Sridharan, ने भविष्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि आने वाले दो से तीन सालों में इंटरनेशनल मार्केट्स से होने वाली बोर्रॉइंग कंपनी के कुल बोर्रॉइंग का 18-20% तक पहुंच सकती है। इस ग्लोबल कैपिटल पर फोकस का मकसद इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स को भारत की बढ़ती इकोनॉमी में डायरेक्ट एक्सपोजर देना है। जैसे-जैसे Piramal Finance भारत के छोटे शहरों और गांवों तक अपनी पहुंच बढ़ा रहा है, यह डायवर्सिफाइड फंडिंग स्ट्रैटेजी सस्टेन्ड ग्रोथ को सपोर्ट करने और कंपीटिटिव क्रेडिट सॉल्यूशंस ऑफर करने में मदद करेगी।

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