Piramal Finance ने ₹3,850 करोड़ का फंड जुटाया है, जिसमें **₹2,100 करोड़** का QIP और **₹1,750 करोड़** का प्रमोटर-लेड वारंट इश्यू शामिल है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपने रिटेल लेंडिंग बिजनेस को विस्तार देने के लिए करेगी।
फंड जुटाने की दोहरी रणनीति
कंपनी ने अपनी पूंजी मजबूत करने के लिए दोतरफा रास्ता अपनाया है। पहले चरण में ₹2,100 करोड़ का क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) पूरा किया गया, जिसमें प्रति शेयर भाव ₹2,110 तय किया गया। इसके साथ ही, प्रमोटर एंटिटी 'Nithyam Realty' को ₹1,750 करोड़ के वारंट जारी करने का ऐलान हुआ है, जिसकी कीमत भी ₹2,110 प्रति वारंट रखी गई है।
बड़े निवेशकों का भरोसा
इस फंडरेजिंग में दिग्गज निवेशकों का जमावड़ा लगा है। BlackRock और Goldman Sachs जैसी ग्लोबल कंपनियों के साथ-साथ ICICI Prudential, Nippon India, Kotak, Quant, Axis, Motilal Oswal, Tata, Franklin Templeton और Aditya Birla Sun Life जैसे घरेलू नाम भी शामिल हुए हैं। यह संस्थानिक भागीदारी कंपनी के नए बिजनेस मॉडल पर उनके भरोसे को दर्शाती है।
रिटेल बिजनेस पर दांव
कंपनी अब पूरी तरह से रिटेल-लेड और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लेंडिंग की तरफ बढ़ रही है। इसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग और स्मॉल बिजनेस लोन का विस्तार करना है। कंपनी अब तक 60 लाख से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे चुकी है और इस पूंजी का उपयोग अपने लोन बुक को तेजी से बढ़ाने के लिए करेगी।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks & Cautions)
इन्वेस्टर्स को यहां दो चीजों पर नजर रखनी होगी:
- इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution): नए शेयर जारी होने से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम हो सकती है। अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि क्या रिटेल लोन बुक का ग्रोथ इस डाइल्यूशन के असर को बेअसर कर पाएगा?
- ऑपरेशनल रिस्क: छोटे शहरों में आक्रामक विस्तार के साथ क्रेडिट क्वालिटी और रिस्क मैनेजमेंट बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, कंपनी का मौजूदा वैल्यूएशन सेक्टर के कई साथियों के मुकाबले महंगा है, जिसे सही साबित करने के लिए कंपनी को आने वाली तिमाहियों में मजबूत फाइनेंशियल रिजल्ट्स देने होंगे।
