Piramal Capital & Housing Finance ने अपने तिमाही नतीजों में **67%** के उछाल के साथ **₹545 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी की ब्याज आय में **35%** की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन समय से पहले लोन चुकाने (Early Repayment) के ट्रेंड ने रियल एस्टेट सेगमेंट की ग्रोथ को सीमित कर दिया है।
मुनाफे की रफ्तार और मार्जिन में सुधार
सितंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 67% बढ़कर ₹545 करोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी के कोर बिजनेस यानी नेट इंटरेस्ट इनकम में 35% का उछाल आया है। इसके अलावा, नेट इंटरेस्ट मार्जिन भी 0.35% बढ़कर 6.5% हो गया है, जो कंपनी की बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है।
अर्ली रिपेमेंट बना सिरदर्द
निवेशकों के लिए गौर करने वाली बात यह है कि कंपनी को 'अर्ली लोन रिपेमेंट' (समय से पहले कर्ज वापसी) की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मैनेजमेंट के अनुसार, नए लोन का लगभग 70% हिस्सा तय समय से पहले चुका दिया गया है। विशेष रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में यह ट्रेंड ज्यादा देखा गया। कंपनी का मानना है कि अगर यह जल्दी भुगतान न हुआ होता, तो रियल एस्टेट एसेट ग्रोथ जो अभी 7% पर अटकी है, वह 25% तक पहुंच सकती थी।
आगे की रणनीति और एसेट क्वालिटी
कंपनी का फोकस अब अपनी उधारी लागत (Borrowing Cost) को घटाने पर है, जिसके लिए क्रेडिट रेटिंग में हुए सुधार का सहारा लिया जा रहा है। साथ ही, कंपनी का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो बेहतर होकर 52.1% पर आ गया है। एसेट क्वालिटी की बात करें तो ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) स्थिर होकर 2.4% पर बने हुए हैं। हालांकि, दक्षिण भारत के आईटी वर्कफोर्स में कुछ जगहों पर तनाव के संकेत जरूर हैं, जिस पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।
बड़ा बदलाव: दिनेश कुमार खारा की एंट्री
कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए कंपनी ने SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा को 5 साल के लिए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया है। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपनी उधारी लागत को कम करने और लोन रिपेमेंट के इस ट्रेंड को कैसे मैनेज करती है।
