PhonePe का ग्लोबल डंका! UAE से मिला बड़ा रेगुलेटरी अप्रूवल, अब विदेश में भी चलेगी UPI की धाक

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
PhonePe का ग्लोबल डंका! UAE से मिला बड़ा रेगुलेटरी अप्रूवल, अब विदेश में भी चलेगी UPI की धाक

भारतीय फिनटेक कंपनी PhonePe ने UAE में पेमेंट ऑपरेशंस शुरू करने के लिए सेंट्रल बैंक से इन-प्रिंसिपल अप्रूवल हासिल कर लिया है। यह कंपनी का पहला बड़ा इंटरनेशनल कदम है, जो उसकी UPI-आधारित तकनीक को ग्लोबल मार्केट में ले जाएगा।

भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर पर राज करने के बाद अब PhonePe ने ग्लोबल मार्केट की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। कंपनी को UAE के सेंट्रल बैंक से इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल गया है, जिससे वह अब मिडिल ईस्ट में अपनी डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखेगी। कंपनी का लक्ष्य अगले 10 सालों में दक्षिण-पूर्व एशिया और सिंगापुर तक अपने ऑपरेशंस को फैलाना है।

UPI का दम और भारत में मार्केट शेयर

को-फाउंडर समीर निगम के नेतृत्व में PhonePe ने भारत में जो सफलता हासिल की है, वह लाजवाब है। कंपनी के पास भारत के UPI इकोसिस्टम का 45% हिस्सा है। कंपनी हर महीने लगभग 12 अरब ट्रांजेक्शन प्रोसेस करती है, जिसका मूल्य करीब ₹14 लाख करोड़ प्रति महीना है। यही भारी-भरकम डेटा और तकनीक अब कंपनी को विदेशी बाजारों में विस्तार करने का कॉन्फिडेंस दे रही है।

इंटरनेशनल विस्तार की रणनीति

इंटरनेशनल बिज़नेस के हेड रितेश पई के अनुसार, कंपनी वहां कोई साधारण रेमिटेंस फर्म बनकर नहीं, बल्कि लोकल रेगुलेटेड एंटिटी के तौर पर काम करेगी। वहां के स्थानीय बैंकों और फाइनेंस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर काम करना ही इनका मुख्य मंत्र है, ताकि अलग-अलग देशों के कठिन नियमों का पालन किया जा सके।

IPO की तैयारी और रेवेन्यू का गणित

यह ग्लोबल विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब कंपनी अपने भविष्य में आने वाले IPO की चर्चाओं के बीच है। जानकारों के अनुसार, कंपनी का टारगेट वैल्यूएशन $10 बिलियन से $12 बिलियन के बीच है। ऐसे में भारतीय बाजार पर निर्भरता कम करना और रेवेन्यू के नए सोर्स तलाशना कंपनी की प्राथमिकता है।

चुनौतियां अभी बाकी हैं

भले ही यह अप्रूवल एक बड़ी उपलब्धि हो, लेकिन यह फाइनल लाइसेंस नहीं है। कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू करने से पहले PhonePe को UAE के सेंट्रल बैंक की सभी शर्तों को पूरा करना होगा। साथ ही, ग्लोबल मार्केट में पहले से जमे हुए दिग्गजों से मुकाबला करना भी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। अब देखना यह होगा कि कंपनी कितनी तेजी से इन रेगुलेटरी बाधाओं को पार कर अपने बिजनेस को वहां प्रॉफिटेबल बना पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.