PhonePe Invest: रीब्रांडिंग के बाद बहार, 50% उछले नए यूजर्स, लेकिन मुनाफे की चुनौती बरकरार

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AuthorMehul Desai|Published at:
PhonePe Invest: रीब्रांडिंग के बाद बहार, 50% उछले नए यूजर्स, लेकिन मुनाफे की चुनौती बरकरार

PhonePe की ब्रोकरेज इकाई, जिसे पहले Share.Market के नाम से जाना जाता था, ने रीब्रांडिंग के बाद अपने यूजर बेस में **50%** की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी अब नए इन्वेस्टमेंट टूल्स के जरिए Zerodha और Groww जैसे दिग्गजों को चुनौती दे रही है।

बाजार में धाक जमाने की तैयारी

अक्टूबर 2026 में हुए रीब्रांडिंग के बाद PhonePe Invest का प्रदर्शन काफी दमदार रहा है। कंपनी ने न केवल नए ग्राहकों को जोड़ने में 50% की ग्रोथ दिखाई है, बल्कि कुल रजिस्ट्रेशन में 80% का बड़ा उछाल दर्ज किया है। अब कंपनी का पूरा ध्यान एक साधारण ट्रांजैक्शन ऐप से बदलकर एक पूर्ण 'इन्वेस्टमेंट हब' बनने पर है।

नया 'पोर्टफोलियो ऑप्टिमाइज़र' टूल

प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को टक्कर देने के लिए PhonePe ने एक खास 'पोर्टफोलियो ऑप्टिमाइज़र' फीचर पेश किया है। इसके जरिए निवेशक अपने सभी डीमैट अकाउंट्स को एक जगह लिंक कर सकते हैं। यह 'एडवाइजरी-लाइट' टूल यूजर्स को अपने एसेट एलोकेशन को ट्रैक करने और खराब प्रदर्शन करने वाले स्टॉक्स को एक क्लिक में बदलने की सुविधा देता है।

मुनाफे की राह में बाधा

भले ही यूजर नंबर तेजी से बढ़ रहे हों, लेकिन फाइनेंशियल रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां करती है। ₹2,792 करोड़ का नेट लॉस यह दिखाता है कि कंपनी फिलहाल मुनाफे के बजाय मार्केट शेयर हासिल करने पर जोर दे रही है। एक और बड़ी चुनौती यह है कि पेमेंट ऐप का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को स्टॉक मार्केट में एक्टिव ट्रेडर्स में बदलना आसान नहीं है। साथ ही, SEBI के कड़े नियमों के दायरे में रहकर अपने ऑपरेशनल खर्चों को नियंत्रित करना मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह यूजर बेस केवल साइन-अप तक सीमित रहता है या वास्तव में रेगुलर ट्रेडिंग करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.