PhonePe Lending के CEO हेमंत गाला ने बताया कि अब कंपनी का अगला फोकस छोटे कस्बों के उन व्यापारियों पर है, जिन्हें अभी तक फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम का लाभ नहीं मिला है। कंपनी अपने 'Default Loss Guarantee' (DLG) मॉडल के जरिए रूरल इंडिया में क्रेडिट मार्केट को नई रफ्तार देने की तैयारी कर रही है।
फाइनेंशियल सेक्टर का नया फ्रंटियर
भारत की क्रेडिट ग्रोथ अब शहरों से निकलकर छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों की तरफ रुख कर रही है। PhonePe Lending के CEO हेमंत गाला का मानना है कि भविष्य का विस्तार उन सूक्ष्म व्यापारियों (Micro-merchants) को जोड़ने में है, जो अब तक औपचारिक बैंकिंग से दूर रहे हैं। हालांकि देश में अनसिक्योर्ड क्रेडिट की रफ्तार पहले के 25% से घटकर अब 13-15% के बीच स्थिर हो गई है, लेकिन छोटे उद्यमियों के बीच कर्ज की मांग अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है।
रिस्क कम करने का DLG मॉडल
बैंक और NBFCs अक्सर उन लोगों को लोन देने से कतराते हैं जिनका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) नहीं होता। इस कमी को दूर करने के लिए PhonePe ने अपना 'Default Loss Guarantee' (DLG) मॉडल पेश किया है। इसके जरिए कंपनी लोन पोर्टफोलियो के 5% तक के नुकसान की भरपाई करने का रिस्क खुद ले रही है, जिससे बैंकों का भरोसा बढ़ता है। यह उन लोगों के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है, जो पहली बार क्रेडिट सिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं (New to Credit)।
रूरल इंडिया में बढ़ेगा फुटप्रिंट
कंपनी अपने विशाल इकोसिस्टम का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें 60 करोड़ कस्टमर्स और 5 करोड़ मर्चेंट्स शामिल हैं। लोन बांटने के अलावा, PhonePe रूरल और टियर-3 शहरों में 20,000 नए UPI टर्मिनल्स लगाने जा रही है। इन टर्मिनल्स से मिलने वाला डेटा दुकानदारों की क्रेडिट योग्यता आंकने में मददगार साबित होगा। इस डेटा-आधारित रणनीति से ग्रामीण व्यापारियों को भी अब आसानी से बैंक लोन मिल सकेगा, जो कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करेगा।
