पर्सनल लोन में बड़ा बदलाव: अब 'जितना इस्तेमाल, उतना ब्याज' मॉडल की ओर बढ़ रहे भारतीय बैंक

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
पर्सनल लोन में बड़ा बदलाव: अब 'जितना इस्तेमाल, उतना ब्याज' मॉडल की ओर बढ़ रहे भारतीय बैंक

भारत में पर्सनल लोन लेने का तरीका बदल रहा है। अब बैंक फिक्स्ड सम-लोन के बजाय फ्लेक्सीबल क्रेडिट लाइन की ओर बढ़ रहे हैं, जहां ग्राहक केवल इस्तेमाल की गई राशि पर ही ब्याज देंगे। यह ग्राहकों की बदलती मांग और डिजिटल लेंडिंग को पारदर्शी बनाने के सरकारी लक्ष्यों के अनुरूप है।

पर्सनल क्रेडिट में बड़ा बदलाव

भारत में पर्सनल क्रेडिट यानी व्यक्तिगत कर्ज का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पहले जहां उधार लेने वाले अपनी जरूरत के हिसाब से एक फिक्स्ड अमाउंट का लोन लेते थे, जिस पर भले ही पूरी रकम इस्तेमाल न हो, फिर भी पूरे अमाउंट पर ब्याज देना पड़ता था। लेकिन अब बैंक और फाइनेंसियल कंपनियां फ्लेक्सीबल क्रेडिट मॉडल की ओर बढ़ रही हैं। इस नए मॉडल में ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से किश्तों में पैसे निकाल सकते हैं और केवल उतनी ही राशि पर ब्याज देंगे, जितनी उन्होंने असल में इस्तेमाल की है।

फ्लेक्सीबल क्रेडिट प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग

कई फाइनेंसियल कंपनियां ऐसे प्रोडक्ट्स पेश कर रही हैं जो किसी रिवॉल्विंग क्रेडिट लाइन की तरह काम करते हैं। उदाहरण के लिए, IDFC FIRST Bank ने अपना 'स्मार्ट पर्सनल लोन' ऑफर लॉन्च किया है। इसके तहत ग्राहक ₹50,000 से लेकर ₹15 लाख तक की लिमिट में से अपनी जरूरत के अनुसार ₹10,000 जैसी छोटी रकम भी निकाल सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन पर केवल निकाली गई राशि का ही ब्याज लगेगा, न कि पूरी सेंक्शन लिमिट का। इन प्रोडक्ट्स को अक्सर मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से बंद किया जा सकता है और दोबारा इस्तेमाल के लिए भी सुविधा मिलती है, जिससे बार-बार लोन अप्लाई करने की झंझट खत्म हो जाती है।

रेगुलेटरी और इंडस्ट्री के कारण

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल लेंडिंग में पारदर्शिता लाने पर जोर दे रहा है। केंद्रीय बैंक की हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि लेंडर्स को ग्राहक-केंद्रित सेवाएं और स्पष्ट, नैतिक लेंडिंग प्रैक्टिस को प्राथमिकता देनी चाहिए। ये नए फ्लेक्सीबल क्रेडिट स्ट्रक्चर RBI के 'डिजिटल लेंडिंग डायरेक्शंस' के अनुरूप हैं, जो उधारकर्ताओं को उनके कर्ज पर ज्यादा नियंत्रण देते हैं। जिन फंड्स का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन पर लगने वाले ब्याज को कम करके, ये मॉडल रिटेल ग्राहकों के बीच अधिक अनुशासित वित्तीय प्रबंधन को प्रोत्साहित करते हैं।

जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें

हालांकि, फ्लेक्सीबल क्रेडिट की यह सुविधा कई फायदे देती है, लेकिन निवेशकों और ग्राहकों को संभावित जोखिमों से भी अवगत रहना चाहिए। एक रिवॉल्विंग क्रेडिट स्ट्रक्चर में अगर उधारकर्ता भुगतान अनुशासन बनाए नहीं रखते हैं, तो कभी-कभी कर्ज का कुल बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा, चूंकि ये लोन अक्सर डिजिटल रूप से प्रोसेस किए जाते हैं, इसलिए वे ऑटोमेटेड क्रेडिट स्कोरिंग और अंडरराइटिंग सिस्टम पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। इससे काम तो तेजी से होता है, लेकिन यह उधारकर्ता की भुगतान क्षमता का आकलन करने वाले एल्गोरिदम की सटीकता पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। बैंकों के लिए, इस तरह के मॉडल में ट्रांजिशन के लिए मजबूत टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है, ताकि वे लगातार होने वाले छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन और रियल-टाइम ब्याज गणनाओं को मैनेज कर सकें।

जो निवेशक इस ट्रेंड पर नजर रख रहे हैं, वे देखेंगे कि बैंक इन फ्लेक्सीबल प्रोडक्ट्स को अपने पारंपरिक लोन पोर्टफोलियो के साथ कैसे संतुलित करते हैं। इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक नेट इंटरेस्ट मार्जिन को स्वस्थ बनाए रखते हुए, एक हाई-फ्रीक्वेंसी, डिजिटल-फर्स्ट लेंडिंग प्लेटफॉर्म की ऑपरेशनल लागतों का प्रबंधन कैसे करते हैं। भविष्य में लेंडर्स की परफॉरमेंस रिपोर्ट्स यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगी कि क्या ये नए क्रेडिट प्रोडक्ट्स लंबे समय में ग्राहक रिटेंशन और एसेट क्वालिटी में सुधार करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.