Persistent Systems अपने महंगे कर्ज को कम करने के लिए **₹8,000 करोड़** का फंड जुटाने की तैयारी में है। यह राशि Nagarro के अधिग्रहण के लिए लिए गए शॉर्ट-टर्म लोन को चुकाने में इस्तेमाल होगी।
ब्रिज लोन से बॉन्ड की ओर कदम
Persistent Systems ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ₹8,000 करोड़ के बॉन्ड जारी करने वाली है। इस फंड का मुख्य मकसद उन महंगे शॉर्ट-टर्म ब्रिज लोन को रिफाइनेंस करना है, जो कंपनी ने इस साल की शुरुआत में जर्मनी की कंपनी Nagarro में 94% हिस्सेदारी खरीदने के लिए लिए थे।
ब्रिज लोन का उपयोग तेजी से डील पूरी करने के लिए किया जाता है, लेकिन इनकी ब्याज दरें काफी अधिक होती हैं। बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने से कंपनी को लंबे समय के लिए बेहतर और स्थिर शर्तें मिलेंगी, जिससे आने वाले 1 से 5 वर्षों में कैश फ्लो को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। बता दें कि Nagarro का पूरा अधिग्रहण करीब $1.25 बिलियन का है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
डेट रिस्ट्रक्चरिंग के अलावा, कंपनी ने $450 मिलियन तक इक्विटी के जरिए जुटाने के संकेत भी दिए हैं। निवेशकों के लिए यह हिस्सा काफी अहम है। इक्विटी रेज का मतलब है कि कंपनी नए शेयर जारी कर सकती है, जिससे मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी डाइल्यूट (dilute) हो सकती है और इसका असर प्रति शेयर कमाई (Earnings Per Share) पर पड़ सकता है।
रेटिंग एजेंसी का नजरिया
रेटिंग एजेंसी ICRA ने इन प्रस्तावित बॉन्ड्स को 'AA-plus' रेटिंग दी है। यह रेटिंग कंपनी की मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल और कर्ज चुकाने की क्षमता को दर्शाती है। हालांकि, अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी Nagarro के एकीकरण को कितनी कुशलता से पूरा करती है और इक्विटी रेज का सटीक समय और स्ट्रक्चर क्या होगा।
