RBI एक्शन के बाद शेयर में दिखा उतार-चढ़ाव
सोमवार को One97 Communications (PAYTM) के शेयरों में काफी वोलेटिलिटी (Volatility) देखने को मिली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा अपनी सहयोगी कंपनी Paytm Payments Bank Limited (PPBL) का लाइसेंस रद्द करने के बाद शेयर 8% तक गिरकर NSE पर ₹1,051.10 के इंट्राडे लो (Intraday Low) पर आ गए थे। लेकिन, इसके बाद शेयर में जोरदार वापसी हुई और दोपहर के कारोबार में यह लगभग 1% की मामूली गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। बाजार के जानकारों का कहना है कि निचले स्तरों पर हुई आक्रामक खरीदारी (Aggressive Buying) की वजह से यह रिकवरी आई है, क्योंकि निवेशकों का मानना है कि इस रेगुलेटरी एक्शन का Paytm के मुख्य कामकाज पर सीधा असर कम है।
डी-रिस्किंग के बाद मिली ऑपरेशनल आजादी
One97 Communications पहले ही स्ट्रक्चरल (Structural) और फाइनेंशियल डी-रिस्किंग (Financial De-risking) के कई बड़े कदम उठा चुकी है। कंपनी ने 31 मार्च, 2024 तक PPBL में अपने निवेश को पूरी तरह से राइट-ऑफ (Impaired) कर दिया है, जिसका मतलब है कि पेमेंट बैंक के बंद होने से होने वाले वित्तीय नुकसान का हिसाब पहले ही लगाया जा चुका है। One97 Communications और PPBL के बीच ऑपरेशनल सेपरेशन (Operational Separation) पहले ही पूरा हो चुका था, और PPBL एक स्वतंत्र एंटिटी (Independent Entity) के तौर पर काम कर रहा था। इस स्ट्रैटेजिक मूव (Strategic Move) से यह सुनिश्चित होता है कि Paytm की कोर सर्विसेज - जैसे इसका ऐप, UPI, पेमेंट गेटवे (Payment Gateway) और मर्चेंट सॉल्यूशंस (Merchant Solutions) - बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी, जिसके लिए UPI ट्रांजैक्शंस (UPI Transactions) के लिए कंपनी अन्य बैंकों के साथ पार्टनरशिप (Partnership) का इस्तेमाल कर रही है।
एनालिस्ट्स का भरोसा और ग्रोथ का अनुमान
प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों (Brokerage Firms) ने इस स्टॉक पर पॉजिटिव आउटलुक (Positive Outlook) बनाए रखा है। Jefferies ने ₹1,350 के प्राइस टारगेट (Price Target) के साथ 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है, जो 18% के अपसाइड पोटेंशियल (Upside Potential) का संकेत देता है। फर्म का अनुमान है कि One97 Communications फाइनेंशियल सर्विसेज डिस्ट्रीब्यूशन (Financial Services Distribution) और स्टेबल पेमेंट्स ग्रोथ (Payments Growth) की बदौलत FY26 से FY28 के बीच लगभग 22% की रेवेन्यू सीएजीआर (CAGR) हासिल करेगी। FY28 तक नेट प्रॉफिट ₹1,700 करोड़ के करीब पहुंचने का अनुमान है। Bernstein ने ₹1,500 के प्राइस टारगेट के साथ 'Outperform' रेटिंग दी है, जो 31% के अपसाइड का सुझाव देता है। दोनों फर्मों ने इस बात पर जोर दिया कि RBI की कार्रवाई केवल पेमेंट बैंक तक सीमित है और One97 Communications के कोर बिजनेस को यह खास तौर पर प्रभावित नहीं करती। Goldman Sachs ने ₹1,400 के प्राइस टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है, जो कंपनी के मजबूत कोर पेमेंट और मर्चेंट ऑपरेशन्स की ओर इशारा करता है।
अनिश्चितताएं और चुनौतियां बनी हुई हैं
एनालिस्ट्स की पॉजिटिव राय और कंपनी की डी-रिस्किंग स्ट्रेटेजी (De-risking Strategy) के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं। PPBL की कंप्लायंस फेल्योर (Compliance Failures) और गवर्नेंस इश्यूज (Governance Issues) को लेकर RBI की कड़ी भाषा One97 Communications को प्रभावित कर सकने वाली गहरी गवर्नेंस खामियों के बारे में चिंताएं बढ़ाती है। हालांकि One97 Communications का कहना है कि कोई सीधा वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन एक सहयोगी एंटिटी के खिलाफ यह गंभीर रेगुलेटरी एक्शन लंबे समय तक रेगुलेटरी जांच (Regulatory Scrutiny) और चिंताओं को जन्म दे सकता है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) कम है, लेकिन इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) जैसे अन्य मेट्रिक्स (Metrics) में कमजोरी दिखी है। लगातार प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने और इंटेंसली कॉम्पिटिटिव फिनटेक सेक्टर (Fintech Sector) में टिके रहने की कंपनी की क्षमता, जहां तेजी से इनोवेशन और बदलते रेगुलेशन का सामना करना पड़ता है, एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिनटेक सेक्टर RBI के दिशानिर्देशों से काफी प्रभावित होता है, और भविष्य में रेगुलेटरी बदलाव अप्रत्याशित समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कंपनी के संस्थापक को SEBI से मिले नोटिस सहित अतीत की रेगुलेटरी चुनौतियां निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह देती हैं।
भविष्य की रणनीति में कोर ग्रोथ पर फोकस
One97 Communications अपने कोर पेमेंट प्रोसेसिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज डिस्ट्रीब्यूशन और मर्चेंट सॉल्यूशंस पर ध्यान केंद्रित कर रही है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि भारत के बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स मार्केट (Digital Payments Market) द्वारा समर्थित, रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार होगा। कंपनी की नई लाइसेंसेस, जैसे NBFC या PPI, हासिल करने की क्षमता उसके प्रोडक्ट ऑफरिंग्स (Product Offerings) को और मजबूत कर सकती है। थर्ड पार्टी एप्लीकेशन प्रोवाइडर (TPAP) मॉडल में ट्रांजिशन (Transition) और लेंडिंग पार्टनर्स (Lending Partners) में विविधता लाकर बिजनेस मॉडल को डी-रिस्क किया गया है। निवेशक डायनामिक रेगुलेटरी और कॉम्पिटिटिव परिदृश्य में एग्जीक्यूशन (Execution), यूजर और मर्चेंट एक्विजिशन (User and Merchant Acquisition) की निरंतरता और प्रॉफिटेबिलिटी टारगेट्स (Profitability Targets) की प्राप्ति पर नजर रखेंगे।
