Paytm Share Price: बर्नस्टीन का बड़ा दांव! ₹2,200 का टारगेट, IPO प्राइस के पार पहुंची ब्रोकरेज की राय

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Paytm Share Price: बर्नस्टीन का बड़ा दांव! ₹2,200 का टारगेट, IPO प्राइस के पार पहुंची ब्रोकरेज की राय

वन97 कम्युनिकेशंस (One97 Communications) के शेयर आज **9%** तक उछल गए। वजह है ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) का स्टॉक पर ₹2,200 का नया टारगेट प्राइस देना। यह पहली बार है जब किसी बड़ी ब्रोकरेज फर्म का टारगेट Paytm के IPO प्राइस **₹2,150** से ऊपर गया है।

बर्नस्टीन का बड़ा बूस्ट

सोमवार को शेयर बाजार में वन97 कम्युनिकेशंस, जो कि Paytm की पैरेंट कंपनी है, के शेयरों में करीब 9% की जोरदार तेजी देखी गई। इस तेजी का मुख्य कारण ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) का स्टॉक पर रेटिंग और टारगेट प्राइस बढ़ाना रहा। बर्नस्टीन ने Paytm के शेयर का टारगेट प्राइस ₹1,500 से बढ़ाकर ₹2,200 कर दिया है। यह एक बड़ा कदम है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी ब्रोकरेज फर्म ने Paytm के जुलाई 2021 में हुए IPO के ₹2,150 के इश्यू प्राइस को पार किया हो।

UPI ट्रांजैक्शन पर MDR की उम्मीद

बर्नस्टीन की यह बुलिश राय (bullish view) मुख्य रूप से UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगने की संभावना पर आधारित है। MDR वह फीस होती है जो मर्चेंट डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के लिए देते हैं। भारत में अब तक UPI ट्रांजैक्शन ग्राहकों और मर्चेंट्स के लिए मुफ्त रहे हैं। हालांकि, ब्रोकरेज ने अपने फाइनेंशियल अनुमानों में फाइनेंशियल ईयर 2028 से कुछ खास तरह के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क लागू होने की उम्मीद जताई है।

मार्जिन में बढ़ोतरी की संभावना

बर्नस्टीन का मानना है कि अगर ट्रांजैक्शन के एक छोटे हिस्से पर भी मामूली शुल्क लगाया जाता है, तो Paytm के नेट पेमेंट्स मार्जिन में 3 से 4 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। (एक बेस पॉइंट का मतलब 0.01% होता है)। इस नए रेवेन्यू सोर्स को जोड़कर, फर्म का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2030 तक Paytm की प्रति शेयर आय (EPS) में 30% तक का इजाफा हो सकता है।

रेगुलेटरी जोखिम और चुनौतियाँ

यह जानना महत्वपूर्ण है कि UPI पर शुल्क लगना अभी भी रेगुलेटरी चर्चा का विषय है, कोई पुख्ता नीति नहीं। सरकार ने संकेत दिया है कि ऐसे शुल्क केवल कुछ खास मूल्य से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू हो सकते हैं, ग्राहकों पर नहीं। हालांकि, इसकी समय-सीमा और शुल्क की दर अभी तय नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कदम पेमेंट प्रोवाइडर्स को इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा में किए गए निवेश की लागत वसूलने में मदद करेंगे।

इसके अलावा, Paytm को मर्चेंट एक्वायरिंग बिजनेस में कड़े कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ रहा है। MDR से रेवेन्यू बढ़ने की संभावना तो है, लेकिन असल कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि कॉम्पिटिटर्स अपनी सेवाओं की कीमत कितनी आक्रामक रखते हैं। अगर कॉम्पिटिशन कड़ा बना रहता है, तो Paytm के लिए ब्रोकरेज के अनुमानों के मुताबिक मार्जिन बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.