वन 97 कम्युनिकेशंस (One 97 Communications), जो Paytm की पैरेंट कंपनी है, के लिए अच्छी खबर आई है। 30 जून 2026 तक, कंपनी में घरेलू शेयरधारिता बढ़कर **51.6%** हो गई है। म्यूचुअल फंड्स और बीमा कंपनियों की बढ़ी हुई हिस्सेदारी के चलते यह लगातार दूसरा क्वार्टर है जब कंपनी में भारतीय स्वामित्व बहुमत में है।
देसी निवेशकों का बढ़ा भरोसा
पेटीएम (Paytm) की पैरेंट फर्म, वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (One 97 Communications Ltd) अब और मजबूती से भारतीय मालिकाना हक वाली कंपनी बन गई है। कंपनी के शेयरधारिता के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 को समाप्त हुए क्वार्टर में डोमेस्टिक निवेशकों की कुल हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 51.6% हो गई है, जो पिछले क्वार्टर के 50.3% से ज्यादा है।
म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों की अहम भूमिका
इस बढ़ोतरी का मुख्य श्रेय डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Domestic Institutional Investors) को जाता है, जिनकी कुल हिस्सेदारी अब 24.9% पर पहुंच गई है। म्यूचुअल फंड हाउसेस ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है, जिनकी हिस्सेदारी 16.6% से बढ़कर 17.9% हो गई है। यह निवेश 43 म्यूचुअल फंड स्कीम्स में फैला है, जो पिछले क्वार्टर के 41 स्कीम्स से ज्यादा है। मोतीलाल ओसवाल, बंधन, निप्पॉन, मिरे एसेट और कोटक जैसे बड़े फंड हाउसेस ने इस दौरान अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
इसके अलावा, डोमेस्टिक इंश्योरेंस कंपनियों की भी दिलचस्पी बढ़ी है, जिनकी कुल हिस्सेदारी 5.3% हो गई है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस (SBI Life Insurance) उन प्रमुख इंश्योरेंस कंपनियों में से एक है जिसने कंपनी में अपनी पोजीशन मजबूत की है।
वित्तीय मोर्चे पर मजबूती और भविष्य की राह
शेयरधारिता में इस बदलाव के साथ-साथ कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस में भी स्थिरता आई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, कंपनी ने ₹552 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो कि कंपनी का पहला फुल-ईयर प्रॉफिट है। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from operations) में 22% की सालाना बढ़ोतरी के साथ यह ₹8,437 करोड़ तक पहुंच गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में भी जबरदस्त सुधार देखा गया, EBITDA बढ़कर ₹502 करोड़ हो गया, जो पिछले सालों के घाटे से एक बड़ा बदलाव है।
बाजार के जानकारों की नजर इन बदलते फंडामेंटल्स पर है। ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने हाल ही में अपने अनुमानों को एडजस्ट किया है, रेवेन्यू प्रोजेक्शन में 2% और EBITDA आउटलुक में 6% तक की बढ़ोतरी की है। फर्म का मानना है कि पेमेंट्स बिजनेस में लगातार मार्केट शेयर हासिल करना और फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट का ग्रोथ इसके मुख्य कारण हैं। ब्रोकरेज ने यह भी नोट किया कि अगर कंपनी 20% से ऊपर रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखती है, तो इसके वैल्यूएशन मल्टीपल का पुनर्मूल्यांकन हो सकता है।
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह ग्रोथ कितनी टिकाऊ है और कंपनी विकसित हो रहे सेक्टर रेगुलेशंस के बीच अपने मौजूदा प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं। जैसे-जैसे पेटीएम एक प्रतिस्पर्धी फिनटेक माहौल में आगे बढ़ रहा है, अपने यूजर बेस को बनाए रखना और बढ़ाना, साथ ही लागतों का प्रबंधन करना, इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स के लिए मुख्य आकर्षण बना हुआ है।
