पेटीएम (Paytm) ने रेगुलेटरी मुश्किलों के बाद अपनी 'बाय नाउ, पे लेटर' (Buy Now, Pay Later) सर्विस 'पोस्टपेड' (Postpaid) को फिर से लॉन्च कर दिया है। कंपनी अब बैंक पार्टनर्स के साथ मिलकर यह सर्विस दे रही है। यह प्रोडक्ट कंपनी के फाइनेंशियल सर्विसेज रेवेन्यू के लिए काफी अहम है, जो जून तिमाही में **45%** सालाना बढ़ा है।
Detailed Coverage
अब बैंकों के साथ मिलकर Paytm Postpaid
वन97 कम्युनिकेशन्स (One97 Communications), जो पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी है, अपनी 'पोस्टपेड' सर्विस को नए तरीके से आगे बढ़ा रही है। यह 'बाय नाउ, पे लेटर' (BNPL) प्रोडक्ट कंपनी के फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा है। पिछले साल दिसंबर 2023 में अनसिक्योर्ड लेंडिंग (unsecured lending) को लेकर आए रेगुलेटरी बदलावों के कारण इस सर्विस को रोकना पड़ा था। अब इसे UPI के साथ इंटीग्रेट करके फिर से लॉन्च किया गया है, और यह सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के क्रेडिट नियमों के तहत काम करेगी।
बैंक पार्टनरशिप से बढ़ाएंगे रफ्तार
कंपनी के ग्रुप सीएफओ (CFO) मधुर डेओरा ने हालिया Q1 अर्निंग्स कॉल में बताया कि कंपनी इस सेगमेंट को पहले वाले मॉडल से ज्यादा तेजी से बढ़ाना चाहती है। बता दें कि पिछला मॉडल 5 साल में ₹9,000 करोड़ के स्तर तक पहुंचा था। मौजूदा मॉडल पिछले मॉडल से काफी अलग है। अब सारा क्रेडिट पार्टनर बैंकों के फैसले पर होगा। पेटीएम खुद लोन नहीं देगा, बल्कि एक डिस्ट्रिब्यूटर (वितरक) के तौर पर काम करेगा। इससे कंपनी पर सीधा क्रेडिट रिस्क कम होगा, जबकि उसे कमीशन और कलेक्शन फीस मिलती रहेगी।
फाइनेंशियल सर्विसेज रेवेन्यू में जोरदार ग्रोथ
पेटीएम के फाइनेंशियल सर्विसेज डिस्ट्रिब्यूशन सेगमेंट ने जून तिमाही में ₹814 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 45% ज्यादा है। यह ग्रोथ रेट कंपनी के कुल कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ 28% से काफी ज्यादा है। यह दिखाता है कि यह सेगमेंट कंपनी के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यह डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल, जो लेंडर्स को कस्टमर्स से जोड़ता है, कंपनी के लिए हाई-मार्जिन वाला माना जाता है, क्योंकि इसमें पारंपरिक लेंडिंग बिजनेस के मुकाबले कम कैपिटल इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है।
रेगुलेटरी माहौल और जोखिम
निवेशकों को इस प्रोडक्ट के इतिहास पर ध्यान देना चाहिए, जो कभी पेटीएम के लोन डिस्ट्रिब्यूशन वॉल्यूम का मुख्य जरिया था। Q2 FY24 में, पोस्टपेड से जुड़े लोन कंपनी के कुल लोन डिस्ट्रिब्यूशन का 56% थे, और क्रेडिट लिमिट औसतन ₹10,000 थी। हालांकि, जब RBI ने सिस्टमैटिक रिस्क और डिफॉल्ट ट्रेंड्स को मैनेज करने के लिए अनसिक्योर्ड रिटेल लोन पर सख्त नियम लागू किए, तो रेगुलेटरी माहौल बदल गया। हालांकि नया प्रोडक्ट इन गाइडलाइन्स के मुताबिक तैयार किया गया है, फिर भी क्रेडिट पॉलिसी में किसी भी बदलाव या बैंकिंग पार्टनर्स की तरफ से रुचि में कमी का असर इस बिजनेस पर पड़ सकता है। भविष्य में कंपनी की परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कंप्लायंस के दायरे में रहते हुए हाई-क्वालिटी लोन डिस्ट्रिब्यूशन कैसे बनाए रखती है। लोन की मात्रा और पार्टनर बैंक एंगेजमेंट पर किसी भी अपडेट पर नजर रखना सेगमेंट की रिकवरी और स्थिरता को समझने के लिए जरूरी होगा।
