अब भारत के हाथ में Paytm की कमान
One 97 Communications Ltd., जो Paytm ब्रांड चलाती है, अब मेजोरिटी इंडियन ओनरशिप वाली कंपनी बन गई है। मार्च 2026 के अंत तक, डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स के पास कंपनी की 50.3% इक्विटी आ चुकी है। यह एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है, जो पिछले कुछ क्वार्टर्स में डोमेस्टिक शेयर होल्डिंग में लगातार बढ़ोतरी के कारण हुआ है। म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों ने इस शिफ्ट में अहम भूमिका निभाई है, जिन्होंने अपनी होल्डिंग काफी बढ़ाई है। माना जा रहा है कि चीनी निवेशक Antfin जैसे प्लेयर्स के अगस्त 2025 तक बाहर निकलने से रेगुलेटरी कंप्लायंस में भी आसानी होगी।
कॉम्पिटिशन के बीच कैसे लौटाई कंपनी ने रफ्तार?
Paytm ने लगातार तीसरी बार प्रॉफिटेबल क्वार्टर दर्ज किया है। दिसंबर 2025 क्वार्टर में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹225 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू में 20% का ईयर-ऑन-ईयर (YoY) ग्रोथ देखने को मिला, जो ₹2,194 करोड़ तक पहुंच गया। EBITDA ₹156 करोड़ रहा, जो 7% मार्जिन पर है। सब्सक्रिप्शन मर्चेंट की संख्या 1.44 करोड़ से ज्यादा हो गई है। हालांकि, Paytm भारतीय फिनटेक मार्केट में कड़ी कॉम्पिटिशन का सामना कर रही है। UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम शेयर लगभग 8% या उससे कम है, जो मार्केट लीडर्स PhonePe ( 48% से ज्यादा) और Google Pay ( 37% ) से काफी पीछे है। जहाँ PhonePe पेमेंट वॉल्यूम में काफी आगे है, वहीं Paytm मर्चेंट रेवेन्यू में अपने सबसे करीबी कॉम्पिटिटर से दोगुना होने का दावा करती है और मर्चेंट डिवाइस सब्सक्रिप्शन में 1.1 करोड़ से ज्यादा एक्टिव डिवाइस के साथ लीड करती है।
एनालिस्ट्स का भरोसा और टारगेट प्राइस
Paytm के सुधरते फंडामेंटल्स पर ब्रोकरेज हाउसेज ने पॉजिटिव रिएक्शन दिया है। Bank of America ने स्टॉक को अपग्रेड करते हुए मर्चेंट पेमेंट्स और लेंडिंग जैसे हाई-मोनिटाइजेशन सेगमेंट्स में Paytm की लीडरशिप को सराहा है। Bernstein ने भी मर्चेंट बिजनेस में इसके मोनिटाइजेशन एडवांटेज को नोट किया है। फिलहाल, एनालिस्ट्स की कन्सेंसस रिकमेंडेशन 'Buy' है, और उनका एवरेज 12-महीने का प्राइस टारगेट ₹1,312.50 है, जो मौजूदा ट्रेडिंग लेवल्स ₹1,029.10 से लगभग 27% अपसाइड का इशारा देता है। अलग-अलग एनालिस्ट्स ने टारगेट प्राइस ₹1,660 तक भी दिया है। हालांकि, कंपनी का ट्रेलिंग बारह-महीने का P/E रेश्यो अभी भी निगेटिव है, जो -377.77 से -412.65 के बीच बताया जा रहा है। यह हाल की तिमाही की गेन के बावजूद सालाना नुकसान को दर्शाता है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन अप्रैल 2026 के मध्य तक लगभग ₹70,840.9 करोड़ था।
रेगुलेटरी चुनौतियां और कॉम्पिटिशन का दबाव
Paytm की जर्नी कई बड़ी रेगुलेटरी बाधाओं से भरी रही है। RBI ने पहले कंपनी पर KYC नॉन-कंप्लायंस और डेटा शेयरिंग जैसी कई उल्लंघनों के लिए चिंता जताई थी, जिसके चलते जुर्माने और नए कस्टमर्स को ऑनबोर्ड करने पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगे। 2024 की शुरुआत में, Paytm पेमेंट्स बैंक के ऑपरेशंस को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए थे, जिसने डिपॉजिट्स और कुछ बैंकिंग सेवाओं को प्रभावित किया। हालाँकि हाल की तिमाहियों में प्रॉफिटेबिलिटी दिखी है, लेकिन कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2024-2025 के लिए ₹-782 करोड़ का निगेटिव EBITDA रिपोर्ट किया है, जो तिमाही लाभों के विपरीत है। खास तौर पर PhonePe और Google Pay जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, Paytm के कोर पेमेंट सर्विसेज में मार्केट शेयर पर लगातार दबाव बनाए हुए है। अन्य पेमेंट प्रोसेसिंग कॉम्पिटिटर्स में Shopify Pay, Klarna और Braintree शामिल हैं। ऐतिहासिक रूप से, स्टॉक ने काफी वोलेटिलिटी देखी है, जिसमें IPO के बाद 75% से ज्यादा की गिरावट और रेगुलेटरी एक्शन के बाद बड़ी गिरावट शामिल है। मनी लॉन्ड्रिंग और ED की छापेमारी जैसी बातें भी सामने आई हैं।
भविष्य का रास्ता: ग्रोथ और AI का जलवा
भारतीय फिनटेक सेक्टर में भारी ग्रोथ का अनुमान है, जो 2033 तक $867.6 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें पेमेंट सॉल्यूशंस 2026 में 39% से ज्यादा मार्केट शेयर पर कब्जा करेंगे। AI को अपनाना और एम्बेडेड फाइनेंस जैसे मुख्य ट्रेंड्स इंडस्ट्री को आकार देंगे। एनालिस्ट्स Paytm के लिए लगातार रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें 2027 तक सालाना 23% की ग्रोथ देखी जा सकती है, जो इंडस्ट्री के औसत से ज्यादा है। कंपनी का स्ट्रैटेजिक फोकस लोन डिस्ट्रीब्यूशन और इंश्योरेंस जैसी हाई-मार्जिन फाइनेंशियल सर्विसेज पर है, साथ ही कॉस्ट कंट्रोल और AI इंटीग्रेशन भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी और वैल्यू क्रिएशन को बढ़ाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि Paytm का EBITDA मार्जिन अगले तीन से चार सालों में दोगुना से ज्यादा हो जाएगा।