सब्सिडी को बताया 'मामूली', ग्रोथ पर मंडराया खतरा
यूनियन बजट में Unified Payments Interface (UPI) और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ का आवंटन पेमेंट इंडस्ट्री को 'मामूली' लगा है। इंडस्ट्री के लीडर्स उम्मीद कर रहे थे कि यह रकम ₹10,000 करोड़ से ऊपर होगी। यह फंडिंग पेमेंट कंपनियों को रोजाना अरबों ट्रांजैक्शन्स को मुफ्त में संभालने के लिए दी जानी है। इंडस्ट्री का तर्क है कि यह राशि ऑपरेशन्स को बनाए रखने और डिजिटल पेमेंट को अपनाने के अगले महत्वपूर्ण चरण को चलाने के लिए काफी नहीं है।
PCI की चेतावनी: इकोसिस्टम पर पड़ सकता है असर
Payment Council of India (PCI) ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। PCI के चेयरमैन विश्वास पटेल का कहना है कि मुफ्त में रोजाना 30 करोड़ ट्रांजैक्शन्स को प्रोसेस करना और उसके लिए इतनी कम सरकारी मदद मिलना 'पूरे इकोसिस्टम को चोक कर सकता है'। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कम प्रोत्साहनों से अगले 300 मिलियन भारतीयों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ना और दूरदराज के इलाकों में एक्सेप्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर लगाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। UPI के लिए कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ पहले ही घटकर 13 प्रतिशत रह गई है, जो सपोर्ट की जरूरत को दर्शाता है।
MDR की मांग: क्या है वजह?
ज़्यादातर पेमेंट कंपनियां सीधी सब्सिडी नहीं, बल्कि चुनिंदा ट्रांजैक्शन्स के लिए एक नियंत्रित Merchant Discount Rate (MDR) को फिर से लागू करने की मांग कर रही हैं। PCI ने खास तौर पर ₹20 लाख से अधिक सालाना टर्नओवर वाले मर्चेंट्स के लिए पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन्स पर 30 basis points (0.30%) का कम और नियंत्रित MDR लगाने का प्रस्ताव दिया है। उनका तर्क है कि यह बड़े मर्चेंट्स को प्रभावित किए बिना, रेवेन्यू के लगातार स्रोत प्रदान करेगा, क्योंकि बड़े मर्चेंट्स अक्सर दूसरे पेमेंट सिस्टम पर MDR का भुगतान पहले से ही करते हैं।
ग्रामीण इलाकों में विस्तार की चुनौती
भारत के विशाल ग्रामीण इलाकों में डिजिटल पेमेंट एक्सेप्टेंस मैकेनिज्म का विस्तार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विसिंग में काफी निवेश की जरूरत होती है। 2020 में UPI MDR को माफ करने के सरकारी फैसले ने, जहां ग्राहकों और मर्चेंट्स को फायदा पहुंचाया, वहीं लागत का बोझ सीधे पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर डाल दिया। बड़े मर्चेंट्स के लिए प्रस्तावित MDR जैसी पर्याप्त वित्तीय मदद के बिना, इंडस्ट्री को डर है कि वह ग्रामीण ग्राहकों तक पहुंचने और सभी नागरिकों के लिए डिजिटल फाइनेंशियल इन्क्लूजन सुनिश्चित करने की चुनौती का सामना नहीं कर पाएगी।
मर्चेंट की स्थिति
भारत में लगभग 6 करोड़ मर्चेंट्स डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं। इनमें से लगभग 90% यानी 5.4 करोड़ मर्चेंट्स RBI के अनुसार छोटे माने जाते हैं, जिनका सालाना टर्नओवर ₹20 लाख या उससे कम है। शेष 50 लाख मर्चेंट्स को बड़े एंटरप्राइज की श्रेणी में रखा गया है। PCI का प्रस्ताव खास तौर पर इसी बड़े एंटरप्राइज सेगमेंट पर केंद्रित है, जिससे सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है, जो अप्रत्यक्ष रूप से छोटे मर्चेंट्स और ग्राहकों सहित पूरे इकोसिस्टम का समर्थन करेगा।