PB Fintech की सब्सिडियरी Paisabazaar अब म्यूचुअल फंड और बॉन्ड्स जैसे इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ा रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले दो साल में अपने कुल रेवेन्यू का **30%** हिस्सा नॉन-क्रेडिट (Non-credit) स्रोतों से हासिल करना है।
एआई (AI) के दम पर बदलेगी रणनीति
CEO संतोष अग्रवाल के नेतृत्व में Paisabazaar अब एक पूर्ण फाइनेंशियल एडवाइजरी प्लेटफॉर्म बनने की ओर है। कंपनी अपने AI-ड्रिवन टूल्स के जरिए उन मिडिल-इनकम ग्राहकों को टारगेट कर रही है, जिनके पास पारंपरिक वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं की पहुंच नहीं है। इस नए मॉडल में कंपनी कॉरपोरेट बॉन्ड्स, फिक्स्ड डिपॉजिट और डेली एसआईपी (SIP) जैसे प्रोडक्ट्स पेश कर रही है।
PB Fintech के लिए चुनौतियां
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पैरेंट कंपनी PB Fintech के शेयरों पर भारी दबाव है। सितंबर 2026 के अंत से अब तक स्टॉक में करीब 48% की गिरावट दर्ज की गई है। इस बिकवाली की मुख्य वजह IRDAI का वह कंसल्टेशन पेपर है, जिसमें इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन पर कैप (सीमा) लगाने का प्रस्ताव है। चूंकि Policybazaar ग्रुप का मुख्य रेवेन्यू इंश्योरेंस से आता है, इसलिए रेगुलेटरी बदलाव निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं।
डायवर्सिफिकेशन का रास्ता
इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी में उतरकर कंपनी अपनी क्रेडिट और इंश्योरेंस कमीशन पर निर्भरता को कम करना चाहती है। हालांकि, भारतीय वेल्थ-टेक मार्केट काफी कॉम्पिटिटिव है, जहां सफलता के लिए बड़े पैमाने पर कस्टमर रिटेंशन की जरूरत होगी। निवेशकों की नजरें अब नए इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के अडॉप्शन रेट और IRDAI के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो कंपनी के आगामी प्रॉफिट मार्जिन्स को तय करेंगे।
