सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का अंडरराइटिंग घाटा FY26 में **58%** उछलकर **₹29,070 करोड़** पर पहुंच गया है। RBI ने सॉल्वेंसी रेशियो के संकट को देखते हुए तीन बड़ी कंपनियों को सख्त चेतावनी जारी की है।
सरकारी जनरल इंश्योरेंस सेक्टर के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। इस दौरान इंडस्ट्री का कुल अंडरराइटिंग लॉस (Underwriting Loss) ₹29,070.57 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 58.3% की भारी बढ़ोतरी है। सरल शब्दों में कहें तो इन कंपनियों का क्लेम और मैनेजमेंट खर्च उनके प्रीमियम कलेक्शन से कहीं ज्यादा हो गया है।
RBI की रेड फ्लैग
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने तीन सरकारी बीमा कंपनियों—National Insurance Company, Oriental Insurance Company, और United India Insurance—की खराब वित्तीय सेहत पर चिंता जताई है। ये तीनों कंपनियां लगातार 5 क्वार्टर से 150% के अनिवार्य सॉल्वेंसी रेशियो (Solvency Ratio) को मेंटेन करने में नाकाम रही हैं। सॉल्वेंसी रेशियो यह बताता है कि कंपनी के पास अपने संभावित क्लेम्स चुकाने के लिए पर्याप्त कैपिटल है या नहीं। 150% से नीचे जाना निवेशकों और पॉलिसीधारकों के लिए एक बड़ा जोखिम संकेत है।
कौन है इस संकट में अपवाद?
इस कठिन दौर में भी New India Assurance ने बाजी मारी है। यह सरकारी सेक्टर की इकलौती ऐसी कंपनी रही जिसने ₹1,384 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।
क्यों बढ़ रहा है घाटा?
इस संकट के पीछे कई कारण हैं:
- हाई क्लेम रेशियो: मोटर और हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट में लगातार बढ़ रहे क्लेम्स ने मार्जिन पर असर डाला है।
- एक्सपेंस: वेज रिवीजन (Wage Revision) और मैनेजमेंट खर्च बढ़ने से कंपनी का बोझ और बढ़ गया है।
- प्राइसिंग वार: मार्केट शेयर के चक्कर में आक्रामक प्राइसिंग और कम प्रीमियम रखने से भी प्रॉफिटेबिलिटी को नुकसान पहुंचा है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें IRDAI के रुख पर हैं। यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो रेगुलेटर इन कंपनियों के बिजनेस विस्तार पर रोक लगा सकता है या पूंजी डालने (Capital Infusion) का दबाव बना सकता है। फिलहाल, मार्केट अब सरकार की तरफ से आने वाली किसी भी संभावित राहत या कैपिटल सपोर्ट की उम्मीद कर रहा है।
