PSU Banks: बढ़ती लागत के बावजूद PSU Banks का जोश हाई, **11-15%** ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
PSU Banks: बढ़ती लागत के बावजूद PSU Banks का जोश हाई, **11-15%** ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार

बढ़ती डिपॉजिट कॉस्ट और चुनौतियों के बीच देश के सरकारी बैंक अपने **11-15%** क्रेडिट ग्रोथ के लक्ष्य पर मजबूती से टिके हुए हैं। फेस्टिवल सीजन में रिटेल और MSME सेक्टर से मिल रही डिमांड बैंकों के लिए राहत की बड़ी वजह बनी हुई है।

ग्रोथ का मजबूत इंजन

Punjab National Bank, Bank of Baroda और Canara Bank जैसे प्रमुख सरकारी बैंकों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी विस्तार योजनाओं पर कायम हैं। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए इन बैंकों ने 11-15% की क्रेडिट ग्रोथ का टारगेट रखा है। एग्री, MSME और रिटेल लोन की मजबूत मांग की बदौलत बैंक अपनी लोन बुक को लगातार बढ़ा रहे हैं।

लिक्विडिटी का स्मार्ट इस्तेमाल

फंडिंग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स का चतुराई से सहारा लिया है। इस रणनीति ने बैंकों को एक स्थिर और किफायती लिक्विडिटी बफर दिया, जिससे उन्हें घरेलू मार्केट में महंगे टर्म डिपॉजिट्स के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा से अस्थायी राहत मिली है।

मार्जिन और मुनाफे पर नजर

हालाँकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। डिपॉजिट्स के लिए बढ़ती होड़ और बचत का निवेश के अन्य विकल्पों की ओर जाने से बैंकों की लागत बढ़ रही है। बैंक अब लोन री-प्राइसिंग के जरिए इस बोझ को ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें वक्त लगता है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर फिलहाल दबाव दिख रहा है।

रिस्क फैक्टर और आउटलुक

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी बैंकों में फ्रेश नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) के 0.7% से बढ़कर 0.8% (FY27) तक जाने की संभावना है। यह इशारा करता है कि ऊंचे इंटरेस्ट रेट्स के कारण रिटेल और MSME उधारकर्ताओं की चुकाने की क्षमता पर दबाव आ सकता है। फिलहाल, देश के कुल डिपॉजिट्स में सरकारी बैंकों की 41% हिस्सेदारी है, ऐसे में इनका अगले दौर का परफॉर्मेंस सेक्टर की दिशा तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.