SBI का जलवा! PSU Banks रिकॉर्ड ऊंचाई पर, लेकिन क्या ये तेजी टिकेगी?

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AuthorNeha Patil|Published at:
SBI का जलवा! PSU Banks रिकॉर्ड ऊंचाई पर, लेकिन क्या ये तेजी टिकेगी?
Overview

State Bank of India (SBI) के शानदार तीसरी तिमाही के नतीजों ने पब्लिक सेक्टर (PSU) बैंकों में जबरदस्त जोश भर दिया है। इन नतीजों के दम पर Nifty PSU Bank इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है, जो निवेशकों के बीच उत्साह को दर्शाता है।

SBI के नतीजों ने PSU Banks में भरी उड़ान

State Bank of India (SBI) के तीसरी तिमाही (Q3 FY25) के धमाकेदार नतीजों ने पब्लिक सेक्टर (PSU) बैंकों के इंडेक्स में आग लगा दी है। इन नतीजों के दम पर Nifty PSU Bank इंडेक्स ने सोमवार को इंट्राडे में सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 9,193 का नया हाई छुआ। यह तेजी SBI के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 84.32% की जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद आई है, जो कि ₹16,891 करोड़ रहा। बैंक का प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) भी 15.81% बढ़कर ₹23,551 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण ऑपरेटिंग खर्चों पर नियंत्रण रहा। SBI की डोमेस्टिक लोन ग्रोथ (Loan Growth) 14.06% रही, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) 9.81% दर्ज की गई। बैंक ने अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को 3% पर बनाए रखा, जो तिमाही में 3.01% रहा।

सेक्टरल आउटपरफॉर्मेंस और वैल्यूएशन का खेल

पिछले एक महीने में Nifty PSU Bank इंडेक्स में करीब 7% की तेजी देखी गई है, जबकि Nifty 50 सिर्फ 0.5% बढ़ा है। वहीं, पिछले पांच महीनों में PSU Banks इंडेक्स 34% उछला है, जबकि Nifty 50 में सिर्फ 3.8% की बढ़त हुई। फरवरी 2026 की शुरुआत तक, Nifty PSU Bank इंडेक्स का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 8.88 है, जो Nifty Bank इंडेक्स के 16.2 और कई प्राइवेट बैंकों के मुकाबले काफी कम है। SBI का P/E रेश्यो 11.3 से 13.8 के बीच है, जो इसे वैल्यूएशन के लिहाज से आकर्षक बनाता है। वहीं, HDFC Bank का P/E 21.4, ICICI Bank का 19.80 और Kotak Mahindra Bank का 31.79 है। यह वैल्यूएशन गैप दर्शाता है कि मार्केट PSU Banks की सुधरती एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी को नया महत्व दे रहा है। हालांकि, सोमवार के जोरदार उछाल के बावजूद, 6 फरवरी को दिन के अंत में यह इंडेक्स 0.51% गिरकर बंद हुआ, जो ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली या कुछ सतर्कता का संकेत हो सकता है।

क्रेडिट-डिपॉजिट का बढ़ता फासला और मार्जिन पर दबाव

SBI और अन्य PSU Banks में लोन की मांग तो मजबूत बनी हुई है, लेकिन क्रेडिट ग्रोथ और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच बढ़ता फासला एक अहम चिंता का विषय है। दिसंबर 2025 के अंत तक, भारत का कुल क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो दो दशकों में सबसे अधिक 81.75% पर पहुंच गया। SBI का क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो भी FY16 के बाद पहली बार 80% के पार 81% पर पहुंच गया। जहां एक ओर यह बैंकों के फंड के कुशल इस्तेमाल का संकेत देता है, वहीं क्रेडिट ग्रोथ का डिपॉजिट ग्रोथ से तेज होना फंडिंग पर दबाव बना सकता है। बैंकों को लोन की मांग पूरी करने के लिए मार्केट से ज्यादा उधारी लेनी पड़ रही है, जिससे फंडिंग कॉस्ट बढ़ सकती है। इस कारण, बैंक प्रॉफिटेबिलिटी के लिए अहम नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव आने की आशंका है। हालांकि SBI ने अपना NIM गाइडेंस 3% पर बनाए रखा है, लेकिन डिपॉजिट की बढ़ती लागत निकट भविष्य में मार्जिन को प्रभावित कर सकती है, जो सेक्टर में एक आम ट्रेंड है।

सावधानी की घंटी: 'बियर केस' क्या कहता है?

बाजार में चल रहे उत्साह और SBI के मजबूत नतीजों के बावजूद, कुछ ऐसे फैक्टर हैं जिन पर गौर करना जरूरी है। Nifty PSU Bank इंडेक्स की तेज रफ्तार, जो कि मोमेंटम और वैल्यूएशन आर्बिट्रेज से प्रेरित है, करेक्शन का शिकार हो सकती है। SBI का PPOP ग्रोथ भले ही मजबूत रहा हो, लेकिन 'अन्य आय' (Other Income) में साल-दर-साल सिर्फ 3.6% की मामूली ग्रोथ देखी गई, जो पहले की बड़ी उछाल की रिपोर्टों से अलग है। इससे पता चलता है कि प्रॉफिट का मुख्य आधार नेट इंटरेस्ट इनकम और कंट्रोल्ड खर्च रहे हैं, न कि नॉन-इंटरेस्ट इनकम। इसके अलावा, बढ़ता क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो दिखाता है कि लोन ग्रोथ को फंड करने के लिए उधारी पर निर्भरता बढ़ रही है, जो स्थिर ब्याज दर वाले माहौल में और महंगा साबित हो सकता है। RBI ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा है। SBI का क्रेडिट-कॉस्ट रेश्यो Q3FY25 में 0.24% रहा, जो प्रोविजनिंग को नियंत्रित दिखाता है, लेकिन कुल प्रोविजन ₹4,507 करोड़ तक बढ़ गए। प्राइवेट बैंकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, जो प्रोडक्ट इनोवेशन और डिजिटल एंगेजमेंट में ज्यादा फुर्तीले माने जाते हैं, PSU Banks के लिए एक संरचनात्मक चुनौती बनी हुई है, भले ही उनके पास अभी वैल्यूएशन का फायदा हो।

भविष्य का आउटलुक और एनालिस्ट्स की राय

आगे चलकर, एनालिस्ट्स SBI को लेकर आम तौर पर पॉजिटिव बने हुए हैं। 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की कंसेंसस रेटिंग और ₹1,126.79 के औसत 12-महीने के टारगेट प्राइस के साथ, एक्सपर्ट्स SBI की मजबूत बैलेंस शीट, मार्केट लीडरशिप और स्थिर एसेट क्वालिटी को सहारा मान रहे हैं। कुछ एनालिस्ट्स का प्राइस टारगेट ₹1,300 तक भी है। माना जा रहा है कि PSU बैंकिंग सेक्टर को जारी आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों से फायदा मिलता रहेगा। हालांकि, हालिया आउटपरफॉर्मेंस की सस्टेनेबिलिटी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक डिपॉजिट की लागत को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज कर पाते हैं, आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के बीच एसेट क्वालिटी बनाए रखते हैं, और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कैसे करते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का रेगुलेटरी स्टैंस, जिसमें डिजिटल पेमेंट को मजबूत करना और ग्राहक सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हैं, एक स्थिर ऑपरेटिंग माहौल प्रदान करता है।

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