PSU Banks के लिए बम्पर कमाई! इंश्योरेंस कमीशन से **₹2,795 करोड़** का मुनाफा, SBI सबसे आगे

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
PSU Banks के लिए बम्पर कमाई! इंश्योरेंस कमीशन से **₹2,795 करोड़** का मुनाफा, SBI सबसे आगे

वित्त वर्ष 2026 में पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSUs) ने इंश्योरेंस प्रोडक्ट बेचकर अपनी फीस इनकम में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) इस मामले में सबसे आगे रहा, जिसने **₹2,795 करोड़** का इंश्योरेंस कमीशन कमाया। हालाँकि, म्यूचुअल फंड (MF) कमीशन से होने वाली आय में बैंकों के बीच मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली।

इंश्योरेंस कमीशन में SBI का जलवा!

वित्त वर्ष 2026 में पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSUs) ने अपनी गैर-ब्याज आय (Non-Interest Income) को बढ़ाने के लिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के डिस्ट्रीब्यूशन पर खास जोर दिया। अपनी बड़ी ब्रांच नेटवर्क का फायदा उठाते हुए, इन बैंकों ने इंश्योरेंस कमीशन को अपने रेवेन्यू का एक अहम हिस्सा बना लिया है, जिससे पारंपरिक लोन से होने वाली आय पर निर्भरता कम हुई है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने इस सेगमेंट में अपनी बादशाहत कायम रखी है। FY26 में बैंक ने ₹2,795.01 करोड़ का इंश्योरेंस कमीशन कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले 19.26% ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस की एक बड़ी वजह बैंक का अपनी सब्सिडियरी SBI Life Insurance के साथ तालमेल रहा, जिसने कुल इंश्योरेंस कमीशन रेवेन्यू का 85%, यानी ₹2,384.63 करोड़, का योगदान दिया। इसके अलावा, SBI ने अपने एसेट मैनेजमेंट आर्म, SBI Mutual Fund की मदद से म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन से ₹1,617.52 करोड़ कमाए।

अन्य पब्लिक सेक्टर बैंकों ने भी इस मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया। केनरा बैंक (Canara Bank) ने इंश्योरेंस कमीशन में 15.67% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो कुल ₹566.36 करोड़ रही। वहीं, म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन फीस में 8.41% का इजाफा हुआ। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने इंश्योरेंस से जुड़ी आय में 3.76% का इजाफा करते हुए ₹368.93 करोड़ कमाए। छोटे बैंकों में भी यह ट्रेंड दिखा, जहाँ UCO बैंक ने म्यूचुअल फंड कमीशन इनकम में 42.04% की जोरदार उछाल दर्ज की।

फीस स्ट्रीम्स में अलग-अलग प्रदर्शन

जहाँ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से होने वाली आय अपेक्षाकृत स्थिर रही, वहीं म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन का प्रदर्शन बैंकों के बीच काफी मिला-जुला रहा। कई बैंकों ने म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट्स बेचने से होने वाली आय में गिरावट दर्ज की, जो दर्शाता है कि इंश्योरेंस की मांग की तुलना में बाजार की स्थितियाँ और ग्राहकों की पसंद इन निवेशों के लिए ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाली है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने दोनों कैटेगरी में दोहरे अंकों की गिरावट देखी, जहाँ इंश्योरेंस कमीशन 8.61% और म्यूचुअल फंड की आय 13.14% गिरी।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन में 10.77% की कमी का अनुभव किया, जबकि म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन से उसकी आय बढ़ गई। प्रदर्शन में ये अंतर बताते हैं कि बैंकों को विभिन्न ग्राहक वर्गों में फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की क्रॉस-सेलिंग करने में ऑपरेशनल चुनौतियाँ आती हैं।

रेगुलेटरी फोकस और आगे की राह

निवेशकों के लिए, ये फीस-आधारित आय के स्रोत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें अक्सर कोर लेंडिंग एक्टिविटीज की तुलना में ज़्यादा प्रॉफिट मार्जिन होता है। हालांकि, रेगुलेटरी माहौल ज़्यादा सख्त होता जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने पब्लिक सेक्टर बैंकों को कोर बैंकिंग सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की गलत बिक्री (Misselling) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जैसे-जैसे बैंक इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड की बिक्री बढ़ा रहे हैं, इन कंप्लायंस मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता स्थिरता के लिए एक अहम फैक्टर होगी। निवेशक इन बैंकों के तिमाही फीस इनकम ट्रेंड्स पर नज़र रख सकते हैं कि क्या इंश्योरेंस कमीशन की ग्रोथ, अन्य फीस-आधारित सेगमेंट में संभावित अस्थिरता की भरपाई कर पाती है या नहीं।

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