रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा Nifty PSU Bank Index
23 फरवरी 2026 को Nifty PSU Bank index ने 9,840.25 के ऐतिहासिक स्तर को छुआ। यह सिर्फ इंट्रा-डे में 2% की शानदार तेजी नहीं थी, बल्कि पिछले सिर्फ दो ट्रेडिंग सेशन में इस इंडेक्स ने 3.5% का उछाल दर्ज किया है। इसकी तुलना में, बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स इसी अवधि में महज़ 1% ही बढ़ पाया। पिछले एक महीने की बात करें तो PSU Banks के शेयरों में 12% की ज़बरदस्त तेजी आई है, जबकि Nifty 50 इसी दौरान 2.7% तक गिर गया था। इस तूफानी तेजी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अपने नए ऑल-टाइम हाई ₹1,229.90 पर पहुंचा, वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ₹311.25 और इंडियन बैंक (Indian Bank) ₹984 के अपने उच्चतम स्तर पर कारोबार करते दिखे। इस ज़बरदस्त परफॉरमेंस की मुख्य वजह इन बैंकों का रिकॉर्ड Q3 FY26 मुनाफा और सुधरी हुई एसेट क्वालिटी (Asset Quality) है।
वैल्यूएशन पर क्या है जानकारों की राय?
हालांकि PSU Banks इंडेक्स में ज़बरदस्त तेजी आई है, लेकिन जानकारों का कहना है कि अब वैल्यूएशन (Valuation) थोड़ी महंगी हो गई है। Nifty PSU Bank index का कंबाइंड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 9.59 है, जबकि प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो करीब 1.58 है। यह अभी भी Nifty 50 के 22.4 P/E और Nifty Bank के 16.47 P/E के मुकाबले काफी आकर्षक है। लेकिन, एनालिस्ट्स का मानना है कि जिस तेज़ी से ये शेयर चढ़े हैं, उससे PSU और प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन में अंतर काफी कम हो गया है। उदाहरण के लिए, SBI का P/E 13.85 के आसपास, बैंक ऑफ बड़ौदा का 8.21, इंडियन बैंक का 10.61 और यूनियन बैंक (Union Bank) का 7.82 है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) के एनालिस्ट्स का कहना है कि PSU Banks के वैल्यूएशन में थोड़ी कसावट आई है, लेकिन बड़े बैंकिंग सेक्टर में और तेजी के लिए प्राइवेट बैंकों की ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) की उम्मीदों में ज़्यादा भरोसा जताना ज़रूरी होगा।
प्राइवेट बैंकों पर कसावट, PSU के लिए अच्छी खबर
जहां एक तरफ PSU Banks ज़बरदस्त तेजी दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्राइवेट लेंडर्स (Private Lenders) के लिए एक बुरी खबर आई है। हरियाणा सरकार ने फ्रॉड (Fraud) के आरोप में IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कारोबार करने से डी-एम्पेनल (De-empaneled) कर दिया है। यह फैसला 22 फरवरी 2026 से लागू हो गया है। IDFC First Bank ने हाल ही में अपने कर्मचारियों और हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े ₹590 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा किया था। सरकार ने यह भी कहा है कि बैंकों ने डिपॉजिट्स को ज़्यादा ब्याज वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगाने के बजाय कम ब्याज वाली सेविंग्स अकाउंट्स में रखकर वित्तीय नुकसान पहुंचाया है। इस रेगुलेटरी एक्शन (Regulatory Action) के चलते AU Small Finance Bank के अकाउंट्स को लेकर भी समीक्षा हो सकती है। यह घटनाक्रम PSU Banks की बुलिश मोमेंटम (Bullish Momentum) के बिल्कुल विपरीत है।
आगे की राह और सेक्टर की मजबूती
PSU Banks ने अतीत में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) की बड़ी समस्याओं से उबरकर एक ज़बरदस्त वापसी की है। नेट एनपीए (Net NPAs) मल्टी-ईयर लो पर हैं और प्रोफिटेबिलिटी (Profitability) में लगातार सुधार देखा जा रहा है। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और उम्मीद के मुताबिक जीडीपी (GDP) ग्रोथ से इन बैंकों में लोन की मांग बढ़ने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का मानना है कि क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) कम रहने से अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) जारी रह सकती है। SBI के लिए एनालिस्ट्स का 'बाय' (Buy) रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस ₹1,280 है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए कई ब्रोकर्स का 12 महीने का टारगेट प्राइस करीब ₹331.33 है। Nifty PSU Bank index भले ही रिकॉर्ड हाई पर है, लेकिन 9,700 के ऊपर बने रहने से मिड-टियर स्टॉक्स में और तेजी देखने को मिल सकती है।