सरकारी बैंकों (PSU Banks) का 'ऑल-टाइम हाई'
Nifty PSU Bank इंडेक्स ने शुक्रवार को 9,691 के ऐतिहासिक स्तर को छूकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। पिछले दो महीनों में इस इंडेक्स में 16% का जबरदस्त उछाल आया है, जबकि Nifty 50 में 1% की मामूली गिरावट रही। यह दिखाता है कि सरकारी बैंकों में निवेशकों का भरोसा कितना बढ़ा है।
कमाई का 'बंपर सीजन' और क्रेडिट ग्रोथ
इस रिकॉर्ड तेजी की सबसे बड़ी वजह Q3FY26 के शानदार नतीजे रहे। सभी 12 सरकारी बैंकों ने अपने अब तक के सबसे बड़े तिमाही नेट प्रॉफिट दर्ज किए हैं। सामूहिक रूप से, इन बैंकों की कमाई पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 17.5% बढ़कर ₹0.55 ट्रिलियन हो गई। वहीं, प्राइवेट बैंकों की ग्रोथ सिर्फ 3.2% रही।
इस मुनाफे में इजाफे का श्रेय नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) में बढ़ोतरी, कुछ बड़े सरकारी बैंकों द्वारा की गई बड़ी ट्रेजरी डील्स, बेहतर रिकवरी और जोरदार क्रेडिट ग्रोथ को जाता है। सरकारी बैंकों ने 14.5% से अधिक की सालाना क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है, जो रिटेल, SME और होलसेल सेगमेंट में अच्छी मांग को दर्शाता है। कुल मिलाकर, पूरे बैंकिंग सिस्टम में FY26 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 12% से ऊपर रहने की उम्मीद है।
एसेट क्वालिटी में सुधार और रेगुलेटरी मदद
सरकारी बैंकों की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) में गिरावट जारी है। बैंकों ने नेट स्लिपेज (Net Slippages) में मामूली 0.1% की बढ़ोतरी दर्ज की, और रिकवरी के बाद यह 0.2% नेगेटिव हो गई। इससे पता चलता है कि बैंकों के बैलेंस शीट मजबूत हुए हैं।
सरकार और RBI के कुछ नए रेगुलेटरी कदम भी सरकारी बैंकों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। RBI के मिस-सेलिंग (Mis-selling) पर लगाम लगाने वाले नए ड्राफ्ट नियम, प्राइवेट बैंकों पर ज्यादा असर डाल सकते हैं, क्योंकि वे bancassurance से ज्यादा कमाई करते हैं। इससे सरकारी बैंकों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
वैल्यूएशन का 'टाइटरोप' और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
हालांकि, इन शानदार नतीजों के बावजूद, आगे की वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर चिंताएं भी हैं। PL Capital के एनालिस्ट्स का मानना है कि FY23 के बाद से सरकारी बैंकों के वैल्यूएशन में 45% से 122% तक का उछाल आ चुका है। अब आगे और बड़े उछाल की उम्मीदें सीमित हैं। कुछ अनुमानों के मुताबिक, मीडियम टर्म में प्राइवेट बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ सरकारी बैंकों से बेहतर रह सकती है।
Nifty PSU Bank इंडेक्स का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेशियो अभी लगभग 9.11-9.55 के आसपास है, जिसे कुछ विश्लेषक 'थोड़ा महंगा' (Slightly Overvalued) मान रहे हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे कुछ बैंक, जिनका P/E लगभग 7.0x है, इंडेक्स के औसत से सस्ते दिख रहे हैं।
जमाओं (Deposits) को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, खासकर CASA (करंट अकाउंट, सेविंग्स अकाउंट) डिपॉजिट्स में धीमी ग्रोथ देखी जा रही है। इससे कुछ सरकारी बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव आ सकता है।
आगे क्या?
State Bank of India (SBI), Bank of Baroda, और Punjab National Bank जैसे बड़े सरकारी बैंकों का इंडेक्स में बड़ा वेटेज है, जो एक जोखिम भी हो सकता है। Canara Bank के NIM पर दबाव की खबरें भी चिंता का विषय हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कुल डिपॉजिट ग्रोथ भी सिस्टम की औसत से कम रही।
कुल मिलाकर, सरकारी बैंकों के लिए आउटलुक मिला-जुला है। मजबूत फंडामेंटल और रेगुलेटरी सपोर्ट के बावजूद, निवेशकों को चुनिंदा बैंकों पर ध्यान देना होगा। आगे की ग्रोथ के लिए बैंकों को मार्जिन को बनाए रखने और सस्टेनेबल क्रेडिट ग्रोथ पर फोकस करना होगा।