सरकारी बैंकों जैसे इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) को प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट (PSLC) बेचकर भारी नॉन-इंटरेस्ट इनकम (Non-Interest Income) मिल रही है। यह उछाल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में आक्रामक ग्रोथ के कारण आया है, जिससे बैंक रेगुलेटरी टारगेट्स को पार कर पा रहे हैं।
Detailed Coverage
PSLC की बिक्री से बंपर कमाई
साल 2026-27 के पहली तिमाही (Q1FY27) में सरकारी बैंकों ने नॉन-इंटरेस्ट इनकम में ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। इसका मुख्य कारण प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट (PSLC) की बिक्री है। दरअसल, जो बैंक एग्रीकल्चर और छोटे उद्योगों जैसे सेक्टर्स में रेगुलेटरी टारगेट से ज़्यादा लोन दे चुके होते हैं, वे अपनी अतिरिक्त क्षमता दूसरे बैंकों को बेच देते हैं, जिन्हें इस टारगेट को पूरा करना होता है।
IOB की शानदार परफॉरमेंस
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) इस ट्रेंड का बड़ा फायदा उठाने वालों में से एक है। बैंक ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में PSLC कमीशन से ₹863 करोड़ की इनकम रिपोर्ट की है। यह पिछले क्वार्टर के ₹48 करोड़ की तुलना में लगभग 1,698% की भारी बढ़ोतरी है। वहीं, पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले यह इनकम 333% से ज़्यादा बढ़ी है। इस सेगमेंट से हुई कमाई ने बैंक की कुल नॉन-इंटरेस्ट इनकम को 67.31% बढ़ाकर ₹2,160 करोड़ तक पहुंचा दिया।
गोल्ड लोन का अहम रोल
PSLC बेचने की यह क्षमता बैंकों के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में तेजी से हो रही बढ़ोतरी से सीधे जुड़ी है। कई सरकारी बैंक इन दिनों गोल्ड-बैक्ड लेंडिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि इसमें क्रेडिट साइकिल छोटा और रिस्क कम होता है। आक्रामक तरीके से गोल्ड लोन बुक बढ़ाने की वजह से ये बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस मंडेट को आसानी से पार कर रहे हैं, जिसमें बैंकों को अपने नेट बैंक क्रेडिट का 40% प्रायोरिटी सेक्टर्स में लगाना होता है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की रणनीति
IOB के अलावा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने भी इसी तिमाही में PSLC की बिक्री से ₹250 करोड़ कमाए हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि बैंक का प्रायोरिटी सेक्टर एडवांसेस फिलहाल नेट बैंक क्रेडिट का 58% है, जो रेगुलेटरी ज़रूरत से काफी ऊपर है। यह अतिरिक्त क्षमता बैंक को नॉन-इंटरेस्ट रेवेन्यू जेनरेट करने में मदद करती है, जिससे ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी को सहारा मिलता है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बातें
जहां एक ओर PSLC की बिक्री से मिली इनकम ने तिमाही नतीजों को बेहतर बनाया है, वहीं निवेशकों को कुछ बातों पर गौर करना चाहिए। PSLC से होने वाली फीस इनकम, सर्टिफिकेट्स की मार्केट में डिमांड-सप्लाई गैप पर निर्भर करती है, जो दूसरे बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ प्रोफाइल के हिसाब से बदल सकती है। इसके अलावा, गोल्ड लोन सेक्टर के बढ़ने के साथ, यह देखना ज़रूरी होगा कि बैंक एसेट क्वालिटी और कोलेटरल स्टोरेज व वैल्यूएशन से जुड़े ऑपरेशनल रिस्क को कैसे मैनेज करते हैं। इस इनकम की सस्टेनेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक रेगुलेटरी नॉर्म्स और रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क का पालन करते हुए अपने प्रायोरिटी सेक्टर पोर्टफोलियो को कैसे बढ़ाते रहते हैं।
