Q4 में PSBs का दबदबा, पर एसेट क्वालिटी की चिंताएं
Q4FY26 में पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) ने नेट प्रॉफिट और लोन बुक ग्रोथ के मामले में प्राइवेट सेक्टर बैंकों (PVBs) को पीछे छोड़ दिया, जो इस सेक्टर के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। PSBs ने अपनी एसेट यील्ड्स को बेहतर बनाने के लिए रिटेल, MSME और अनसिक्योर्ड लोन पर फोकस बढ़ाया है।
नंबर्स और परफॉरमेंस
इस तिमाही में PSBs की लोन ग्रोथ 13-17% के दायरे में रही, जो PVBs की 10-19% ग्रोथ से मेल खाती है या थोड़ी आगे है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में भी PSBs का प्रदर्शन आम तौर पर बेहतर रहा। हालांकि, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के NIM में 17 बेसिस पॉइंट की तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) गिरावट देखी गई, जो 2.81% पर आ गया, इसका मुख्य कारण रेपो रेट में हुए बदलाव बताए गए।
वहीं, एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर PVBs का दबदबा कायम रहा। HDFC Bank, ICICI Bank, और Axis Bank जैसे प्रमुख प्राइवेट बैंकों में फ्रेश स्लिपेज (नए डूबे हुए लोन) QoQ 20-28% तक कम हुए, जो बेहतर अंडरराइटिंग का संकेत है। इसके विपरीत, Punjab National Bank (PNB) में स्लिपेज 47% तक बढ़ गए, जो चिंता का विषय है। इसके अलावा, कई बैंकों ने मार्केट वोलेटिलिटी के चलते ट्रेजरी इनकम में भारी कमी या नुकसान भी दर्ज किया।
बड़े रेगुलेटरी बदलाव और भविष्य की चुनौतियां
बैंकिंग सेक्टर आने वाले समय में कई बड़े रेगुलेटरी बदलावों के लिए तैयार हो रहा है। अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) नॉर्म्स बैंकों के लिए एक बड़ा कदम होंगे। इस बदलाव में बैंकों को 'इनकर्ड लॉस' मॉडल की जगह 'फॉरवर्ड-लुकिंग' अप्रोच अपनानी होगी, जिससे प्रोविजनिंग की पद्धत बदल जाएगी। अनुमान है कि इससे भारतीय बैंकिंग सेक्टर की कैपिटल एडिक्वेसी पर 60-70 बेसिस पॉइंट का असर पड़ सकता है।
जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं, खासकर वेस्ट एशिया में चल रहा संघर्ष, भी एक अहम कारक है। हालांकि इसका सीधा असर अभी कम है, पर सप्लाई चेन की दिक्कतें, बढ़ती लागतें और करेंसी वोलेटिलिटी रिटेल और MSME बॉरोअर्स के कैश फ्लो पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे धीरे-धीरे एसेट क्वालिटी से जुड़े जोखिम उभर सकते हैं।
वैल्यूएशन और NIM का दबाव
वैल्यूएशन के मामले में, कई बड़े प्राइवेट बैंक प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, ICICI Bank का P/E रेशियो 16.7x है, जो इंडियन बैंक्स इंडस्ट्री के औसत 12.4x से अधिक है। HDFC Bank का P/E 15.55x है। दूसरी ओर, Canara Bank जैसे पब्लिक सेक्टर बैंक 6.2-6.7x के P/E के साथ ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं और एनालिस्ट्स ने इन्हें 'बाय' रेटिंग भी दी है।
NIM पर दबाव बैंकों के लिए एक लगातार बनी रहने वाली चुनौती है। SBI का डोमेस्टिक NIM घटकर 2.93% पर आ गया है और CASA डिपॉजिट्स का शेयर भी कम हुआ है। HDFC Bank का NIM 3.67% रहा, वहीं इसके NPAs में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। इन सबके बीच, कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण मार्जिन सस्टेनेबिलिटी पर सवाल बने हुए हैं।
FY27 के लिए उम्मीदें और जोखिम
FY27 के लिए, ज्यादातर बैंकों को लोन और डिपॉजिट में डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, वेस्ट एशिया संकट जैसी अनिश्चितताओं के चलते कुछ बैंक अभी स्पष्ट गाइडेंस देने में संकोच कर रहे हैं। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि Indian Bank के लिए एडवांसेस ग्रोथ 11-13% और NIM 3.1-3.3% के बीच रह सकता है, जबकि GNPA रेशियो 1.5-1.6% रहने की संभावना है।
बदलते रेगुलेटरी माहौल और जियोपॉलिटिकल जोखिमों को देखते हुए, भविष्य के अनुमानों के प्रति सावधानी बरतना आवश्यक है। HDFC Bank की ₹27,80,601 Cr की कंटिंजेंट लायबिलिटीज भी बैंक के कुल जोखिम प्रोफाइल का एक हिस्सा हैं।
