बंपर मुनाफे की ओर सरकारी बैंक
भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) का वित्तीय प्रदर्शन एक बड़ी छलांग लगा रहा है। इस मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY26) में इन बैंकों का संयुक्त मुनाफा ₹2 लाख करोड़ के पार जाने का अनुमान है। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब बैंक इतने बड़े मुनाफे का कीर्तिमान रच रहे हैं। इससे पहले FY23 में इनका मुनाफा ₹1.05 लाख करोड़, FY24 में ₹1.41 लाख करोड़ और FY25 में ₹1.78 लाख करोड़ रहा था। इस शानदार मुनाफे की मुख्य वजहों में 12% की दमदार क्रेडिट ग्रोथ और 10% के आसपास डिपॉजिट (जमा) ग्रोथ शामिल है।
वैल्यूएशन में डिस्काउंट, निवेश का मौका?
बाजार के दिग्गजों के मुकाबले PSBs अभी भी वैल्यूएशन के मामले में आकर्षक दिख रहे हैं। Nifty PSU Bank इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 10.05 है, जो कि ब्रॉडर मार्केट के 23.15 के P/E से काफी कम है। व्यक्तिगत PSBs की बात करें तो, इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas Bank) का P/E 14.10, बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) का 7.78 और इंडियन बैंक (Indian Bank) का 10.38 के आसपास है। ये दरें कई प्राइवेट बैंकों के मुकाबले काफी कम हैं, जो इन बैंकों में आगे ग्रोथ की उम्मीद जगाती हैं।
एसेट क्वालिटी में गजब का सुधार
PSBs की वित्तीय सेहत में सुधार की एक बड़ी वजह उनकी एसेट क्वालिटी का लगातार बेहतर होना है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) गिरकर 2.30% के स्तर पर आ गए हैं, जो पिछले कई सालों का निचला स्तर है। नेट NPAs भी सितंबर 2025 तक करीब 3% पर आ गए थे। प्रोविजनिंग कवरेज रेश्यो (PCR) बढ़कर 94.63% हो गया है, जो बैंकों की लोन रिकवरी क्षमता को दिखाता है। वहीं, कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) भी 15.96% पर मजबूत बना हुआ है। Q3 FY26 के नतीजों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के नेट NPA 0.15% और इंडियन ओवरसीज बैंक के 0.24% रहे, जो शानदार प्रदर्शन का संकेत देते हैं।
सरकार की बड़ी चाल: FDI बढ़ाने की तैयारी
सरकार इन बैंकों को और मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। बैंकों के लिए कैपिटल जुटाने के मकसद से सरकार ने इन बैंकों में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की सीमा को मौजूदा 20% से बढ़ाकर 49% करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर अंतर-मंत्रालयी समीक्षा चल रही है। अभी प्राइवेट बैंकों में 74% तक FDI की इजाजत है। इससे PSBs को विदेशी पूंजी जुटाने में आसानी होगी। इसके अलावा, सरकार ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र से ₹2,627.52 करोड़ और इंडियन ओवरसीज बैंक से ₹1,419.36 करोड़ की हिस्सेदारी बेचकर भी कैपिटल जुटाया है।
चुनौतियां और आगे की राह
भारतीय अर्थव्यवस्था के FY26 में 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा बूस्टर है। PSBs ने 2025 में प्राइवेट बैंकों को स्टॉक रिटर्न में पीछे छोड़ा है। हालांकि, SBI, HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंक अभी भी मुनाफे के मामले में आगे हैं। PSBs को न केवल प्राइवेट बैंकों से, बल्कि फिनटेक कंपनियों से भी कड़ी टक्कर मिल रही है। क्रेडिट ग्रोथ (12-13%) की तुलना में डिपॉजिट ग्रोथ (10-10.6%) का थोड़ा धीमा होना नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव डाल सकता है, खासकर अगर RBI ब्याज दरों में कटौती करता है। FDI सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव बड़ा कदम है, लेकिन इसका असर गवर्नेंस पर कैसा होगा, यह देखना बाकी है।
विश्लेषकों का नज़रिया
विश्लेषकों का मानना है कि PSBs के लिए भविष्य में और ग्रोथ की उम्मीद है। कुछ का अनुमान है कि 2026 तक बैंकिंग इंडेक्स में 18-30% तक का उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषक 2026 में मुनाफे में हल्की नरमी की आशंका जता रहे हैं, क्योंकि डिपॉजिट लागत में कमी के साथ-साथ लोन यील्ड में भी कमी आ सकती है। सरकार की FDI बढ़ाने की योजना और लगातार घरेलू आर्थिक विकास PSBs के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, लेकिन इनकी सफलता काफी हद तक इन योजनाओं के अमल पर निर्भर करेगी।