मुनाफे में कैसे आई उछाल?
पब्लिक सेक्टर के बैंकों (PSBs) ने हालिया तिमाही में अपने दमदार प्रदर्शन से सबको चौंका दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) मुनाफे के मामले में सबसे आगे रहा। कई अन्य सरकारी बैंकों ने भी डबल-डिजिट मुनाफा बढ़ाया है। इन नतीजों में ट्रेजरी ऑपरेशंस का बड़ा योगदान रहा, जिसमें Canara Bank और Bank of Baroda ने खास तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं, Punjab National Bank (PNB) और SBI ने राइट-ऑफ खातों से रकम वसूलने में भी सफलता पाई है। Central Bank of India ने भी इस दिशा में योगदान दिया। यह सब सालों की स्ट्रक्चरल क्लीन-अप और बेहतर डिसिप्लिन का नतीजा है, जिससे बैलेंस शीट की क्वालिटी और रिस्क मैनेजमेंट सुधरा है।
वैल्यूएशन का कंट्रास्ट: फायदे में या नुकसान में?
हालांकि, मुनाफे के ये आंकड़े बेशक अच्छे लग रहे हों, लेकिन वैल्यूएशन के मामले में ये सरकारी बैंक अभी भी प्राइवेट सेक्टर के बैंकों से काफी पीछे हैं। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, PSBs आम तौर पर काफी कम Price-to-Earnings (P/E) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, SBI का P/E लगभग 13.8 है, Canara Bank का 7.3, Bank of Baroda का 8.3, और Central Bank of India का 7.4 है। वहीं, प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंक जैसे ICICI Bank का P/E 19-20 के आसपास और Axis Bank का 16.5 के करीब है। इसका मतलब है कि बाजार, इन बैंकों के शानदार नतीजों के बावजूद, इनसे कम ग्रोथ या ज्यादा रिस्क की उम्मीद कर रहा है। PNB के मामले में एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली रही, कुछ ने जनवरी 2026 में रेटिंग घटाई तो 26 फरवरी 2026 को एक एनालिस्ट ने 'Buy' रेटिंग दी। हालांकि, इसका एनालिस्ट कंसेंसस अभी भी न्यूट्रल है। बैंक के एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, SBI का ग्रॉस एनपीए 1.82% और नेट एनपीए 0.47% है। पूरे बैंकिंग सेक्टर में FY2026 में 12% क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें PSBs के 13% की ग्रोथ से आगे निकलने की उम्मीद है।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां और असली चुनौतियां
सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट भले ही मजबूत हुई हो, लेकिन कुछ स्ट्रक्चरल कमजोरियां अब भी बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चिंता कस्टमर सर्विस को लेकर है, जहां प्राइवेट बैंक लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे PSBs अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। हालांकि NPA की रिकवरी सुधरी है, लेकिन सालों से अटके पुराने स्ट्रेस्ड एसेट्स को संभालने में काफी प्रोविजनिंग लगी और रिटर्न पर असर पड़ा। PNB की Q3 FY25-26 की रिपोर्ट में परफॉर्मेंस फ्लैट रही और यह नॉन-ऑपरेटिंग इनकम पर काफी निर्भर रहा। इसके अलावा, बैंकों के सामने एक और चुनौती है - लोन ग्रोथ के मुकाबले डिपॉजिट ग्रोथ का धीमा रहना, जिससे लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़ रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए डिजिटल बैंकिंग नियम और ग्रुप-लेवल रिस्ट्रिक्शन्स जैसे रेगुलेटरी बदलावों से सभी बैंकों को अपनी ऑपरेशन्स में बड़े एडजस्टमेंट करने होंगे। सरकार का FY27 के लिए ₹80,000 करोड़ का विनिवेश (Disinvestment) लक्ष्य भी अहम है, लेकिन पिछले सालों में इसे पूरा करने में आई दिक्कतों को देखते हुए इसकी हासिल होने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की राह और विनिवेश की रणनीति
आगे चलकर भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए उम्मीदें बढ़ रही हैं, लेकिन थोड़ी सावधानी के साथ। इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और डोमेस्टिक डिमांड के सहारे FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ 12% के आसपास रहने का अनुमान है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) स्थिर रहने या थोड़ा कम होने की उम्मीद है, और PSBs को मिड-साइज प्राइवेट बैंकों की तुलना में मार्जिन में थोड़ी और कमी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का FY2026-27 के लिए ₹80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य, पिछले सालों के मुकाबले काफी ज्यादा है। IDBI Bank के संभावित प्राइवेटाइजेशन जैसी बड़ी डील पर भी नजरें रहेंगी। हालांकि, सरकारी लक्ष्य ऐतिहासिक रूप से कम हासिल हुए हैं, इसलिए इस बार भी रणनीति में बदलाव हो सकता है, जैसे कि सीधे विनिवेश की बजाय स्ट्रैटेजिक स्टेक सेल या एसेट मॉनेटाइजेशन पर जोर दिया जा सकता है, जैसा कि NITI Aayog की रणनीति में भी इशारा किया गया है।