पंजाब नेशनल बैंक (PNB) जल्द ही अधिग्रहण फाइनेंस (Acquisition Finance) की दुनिया में कदम रखने जा रहा है। RBI के नए दिशानिर्देशों के बाद, बैंक इस सुविधा को तीसरी तिमाही (Q3) से शुरू करेगा। साथ ही, बैंक ने 30 सितंबर तक **$2.5 अरब** FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से **$425 मिलियन** पहले ही हासिल कर लिए गए हैं। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब बैंक ने जून तिमाही में **₹5,253 करोड़** का शानदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।
Detailed Coverage
अधिग्रहण फाइनेंस: PNB का नया दांव
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने ऐलान किया है कि वे चालू फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही (Q3) से अधिग्रहण फाइनेंस सेवाएं देना शुरू कर देंगे। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए नए फ्रेमवर्क के बाद उठाया गया है, जो 1 जुलाई से लागू हो चुका है। बैंक के बोर्ड ने इस नई बिजनेस लाइन के लिए पॉलिसी को मंजूरी दे दी है।
घरेलू अधिग्रहणों पर फोकस
शुरुआत में, PNB का लक्ष्य घरेलू कंपनियों को अधिग्रहण के लिए फाइनेंस देना होगा। बैंक अपनी एसेट पोर्टफोलियो को बढ़ाने और आय के स्रोतों में विविधता लाने के लिए यह कदम उठा रहा है। RBI के सख्त नियमों के तहत, अधिग्रहण करने वाली कंपनियों को कॉर्पोरेट गारंटी देनी होगी और ट्रांजेक्शन के बाद उनका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 3:1 से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, कर्ज लेने वाले का नेट वर्थ कम से कम ₹500 करोड़ होना चाहिए और उसका तीन साल का प्रॉफिटेबिलिटी का रिकॉर्ड होना ज़रूरी है। लिस्टेड न होने वाली कंपनियों के लिए लोन पाने हेतु इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग अनिवार्य होगी।
विदेशी मुद्रा इनफ्लो को बढ़ावा
अधिग्रहण फाइनेंस के साथ-साथ, PNB अपनी फॉरेन करेंसी डिपॉजिट को बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। बैंक का लक्ष्य 30 सितंबर तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट में $2.5 अरब तक पहुंचना है। 17 जुलाई तक, बैंक $425 मिलियन जुटा चुका था। RBI द्वारा FCNR(B) डिपॉजिट पर ब्याज दरों की सीमा हटाने से इस इनफ्लो को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पिछली तिमाही के नतीजे
यह घोषणा बैंक के जून 30, 2026 को समाप्त तिमाही के मजबूत नतीजों के बाद आई है। PNB ने ₹5,253 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹1,675 करोड़ से काफी ज्यादा है। बैंक की कुल आय ₹37,231 करोड़ पर स्थिर रही, जबकि टैक्स खर्च में कमी आने से बॉटम लाइन को सहारा मिला। बैंक के मुख्य लेंडिंग बिजनेस में भी 2% की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे नेट इंटरेस्ट इनकम ₹10,798 करोड़ हो गया।
निवेशक अब यह देखेंगे कि बैंक इन नई ग्रोथ पहलों को एसेट क्वालिटी मैनेजमेंट के साथ कैसे संतुलित करता है। अधिग्रहण फाइनेंस एक स्पेशलाइज्ड लेंडिंग एरिया है, इसलिए आने वाली तिमाहियों में बैंक की रिस्क स्टैंडर्ड बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
