पंजाब नेशनल बैंक (PNB) इसी साल तीसरी तिमाही (Q3) से एक्विजिशन फाइनेंस (Acquisition Finance) के बाजार में उतरने की तैयारी में है। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उन नए नियमों के बाद उठाया जा रहा है, जो बैंकों को कंपनियों के सौदे का **75%** तक फंड करने की इजाजत देते हैं। इस रणनीति का मकसद घरेलू कंपनियों के मर्जर और एक्विजिशन (M&A) पर फोकस करके बैंक के एसेट पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करना है। हाल ही में, बैंक ने जून तिमाही में **₹5,253 करोड़** का दमदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।
Detailed Coverage
एक्विजिशन फाइनेंस: PNB का नया कदम
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) अपनी क्रेडिट पेशकशों का विस्तार करने की राह पर है और चालू फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही (Q3) से एक्विजिशन फाइनेंस के क्षेत्र में कदम रखेगा। एक्विजिशन फाइनेंस में बैंक, कंपनियों को दूसरी कंपनियों को खरीदने या उनका अधिग्रहण करने में मदद करने के लिए लोन देते हैं। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अपडेटेड गाइडलाइन्स के बाद आया है, जो अब लेंडर्स को किसी भी एक्विजिशन डील वैल्यू का 75% तक फाइनेंस करने की अनुमति देते हैं।
बोर्ड की मंजूरी और फोकस
बैंक के मैनेजमेंट ने साफ कर दिया है कि बैंक के बोर्ड ने इस सेगमेंट के लिए जरूरी पॉलिसी फ्रेमवर्क को हरी झंडी दे दी है। PNB का शुरुआती फोकस घरेलू कंपनियों पर रहेगा, ताकि वह अपने लोन पोर्टफोलियो में विविधता ला सके और नए रेवेन्यू स्ट्रीम्स जेनरेट कर सके। बैंक फिलहाल ऑपरेशंस शुरू करने के लिए एक उपयुक्त पार्टनर की तलाश कर रहा है।
RBI के नियम और शर्तें
निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि RBI ने इस तरह के लेंडिंग से जुड़े जोखिमों को मैनेज करने के लिए कुछ खास शर्तें तय की हैं। कर्ज लेने वाली कंपनियों को पोस्ट-एक्विजिशन डेट-टू-इक्विटी रेशियो 3:1 से ज्यादा नहीं रखना होगा और कॉरपोरेट गारंटी देनी होगी। इसके अलावा, कर्जदारों के पास कम से कम ₹500 करोड़ का नेट वर्थ होना चाहिए और पिछले तीन सालों में लगातार नेट प्रॉफिट कमाने का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए। वहीं, अनलिस्टेड कंपनियों के लिए RBI का नियम है कि उनके पास इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग होनी चाहिए।
बैलेंस शीट को मजबूत करने की कोशिश
यह स्ट्रेटेजिक विस्तार PNB के अपने बैलेंस शीट और लिक्विडिटी को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। 17 जुलाई तक, बैंक $425 मिलियन का फॉरेन करेंसी डिपॉजिट सफलतापूर्वक जुटा चुका है और इसका लक्ष्य 30 सितंबर तक $2.5 बिलियन तक पहुंचना है। फॉरेन करेंसी फंड्स की यह पुश रेगुलेटरी फैसले के बाद आई है, जिसमें कुछ FCNR (B) डिपॉजिट्स पर इंटरेस्ट रेट कैप हटा दिया गया था। इसका मकसद नॉन-रेजिडेंट इंडियंस से ज्यादा इनफ्लो को प्रोत्साहित करना है।
हालिया वित्तीय प्रदर्शन
आंकड़ों की बात करें तो, PNB ने हाल ही में जून तिमाही के लिए ₹5,253 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि है। इस ग्रोथ में टैक्स आउटफ्लो में कमी का भी योगदान रहा। हालांकि, बैंक की कोर इनकम पर नजर रखनी होगी, जिसमें नेट इंटरेस्ट इनकम (लोन पर अर्जित ब्याज और डिपॉजिट पर दिए गए ब्याज का अंतर) 2% बढ़कर ₹10,798 करोड़ हो गया। तिमाही के लिए कुल आय ₹37,231 करोड़ रही।
आगे की राह
इस नए एक्विजिशन फाइनेंस वर्टिकल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक कितनी काबिलियत से क्रेडिट-वर्दी कॉरपोरेट कर्जदारों का चयन करता है और साथ ही RBI के एसेट क्वालिटी नॉर्म्स का कितनी सख्ती से पालन करता है। भविष्य में, शेयरधारक मंजूर किए गए एक्विजिशन लोन की मात्रा, बैंक के ओवरऑल रिस्क प्रोफाइल पर पड़ने वाले प्रभाव और आने वाली तिमाहियों में ये नए लेंडिंग माध्यम नेट इंटरेस्ट मार्जिन में कितना योगदान करते हैं, इन सब पर नजर रख सकते हैं।
