मार्जिन बचाने की नई रणनीति
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) द्वारा अपने Mastercard Platinum डेबिट कार्ड से एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा को हटाना, सिर्फ एक सेवा में कटौती नहीं है, बल्कि ग्राहक बनाने और उन्हें बनाए रखने की बढ़ती लागत पर एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है। पहले जहाँ एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस एक अच्छा कॉम्पिटिटिव फायदा माना जाता था, वहीं अब यह रिटेल सेगमेंट के मुनाफे पर भारी पड़ रहा है। डोमेस्टिक लाउंज में ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ, बैंकों पर प्रति-विजिट का खर्च इतना बढ़ गया है कि इसे मास-मार्केट डेबिट प्रोडक्ट्स के लिए सही ठहराना मुश्किल हो गया है। इन पुरानी सुविधाओं को कम करके, बैंक अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) को बचाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, खासकर ऐसे माहौल में जहाँ डिपॉजिट बढ़ाना महंगा साबित हो रहा है और सस्ते रिटेल फंडिंग के लिए मुकाबला कड़ा है।
प्रीमियम सुविधाओं का रीसेट
यह सुविधा कटौती का ट्रेंड भारतीय बैंकिंग सेक्टर में चल रहे बड़े बदलावों के अनुरूप है। HDFC Bank और कई सरकारी बैंकों सहित अन्य संस्थान भी इसी तरह के फायदों को सख्त खर्च की शर्तों के पीछे सीमित कर चुके हैं। पहले जहाँ बिना शर्त लाउंज एक्सेस मिलता था, अब उसे खर्च-आधारित (Spend-linked) एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया में बदल दिया गया है। इससे यह साफ हो रहा है कि प्रीमियम सुविधाएं सिर्फ हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (High-Net-Worth Individuals) और ज्यादा खर्च करने वाले ग्राहकों के लिए ही होंगी। यह उस दौर का अंत है जब एंट्री-लेवल डेबिट कार्ड पर भी लग्जरी बेनिफिट्स 'फ्री' मिलते थे। अब RuPay और Mastercard जैसे बड़े नेटवर्क भी एयरपोर्ट पार्टनर्स के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट्स की स्थिरता को लेकर जूझ रहे हैं।
लॉयल्टी पर असर का खतरा?
एक बड़े संस्थान के नजरिए से देखें तो, लंबे समय से चली आ रही कार्ड सुविधाओं को अचानक बंद करना ग्राहकों की वफादारी (Customer Loyalty) और ब्रांड की इमेज के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। जहाँ एक तरफ ये कदम短期 खर्चों को स्थिर कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ बैंक के युवा और ट्रैवल-लवर ग्राहकों के बीच असंतोष बढ़ सकता है, जो लाइफस्टाइल परक्स को ज्यादा अहमियत देते हैं। इसके अलावा, खर्च-आधारित लिमिट्स (Spend-linked thresholds) एक ऐसी रुकावट खड़ी करती हैं जो बैंक के पूरे डेबिट कार्ड पोर्टफोलियो के वैल्यू प्रपोजीशन को कम कर सकती है। नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (Non-Performing Asset - NPA) रेशियो पर लगातार नजर रखते हुए, बैंकों का रेवेन्यू-जेनरेटिंग इनोवेशन के बजाय खर्च-कटौती के उपायों पर निर्भर रहना, अस्थिर मैक्रोइकॉनोमिक माहौल में एक रक्षात्मक रुख माना जा सकता है।
भविष्य की राह और कॉम्पिटिटिव पोजिशनिंग
आगे चलकर, एनालिस्ट्स का मानना है कि कॉम्प्लिमेंट्री लाउंज एक्सेस वाले बाकी बचे कार्ड्स पर भी और सख्ती की जा सकती है। उम्मीद की जा रही है कि इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक पूरे बैंकिंग सेक्टर में डोमेस्टिक लाउंज एक्सेस पॉलिसी में और बदलाव देखे जाएंगे। PNB को अपने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट वैल्यू प्रपोजीशन (Value Proposition) पेश करना होगा, ताकि वे डिजिटल-फर्स्ट फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की ओर न जाएं जो फिलहाल अलग तरह के रिवॉर्ड आर्किटेक्चर के साथ प्रयोग कर रहे हैं। इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या बैंक इन सुविधाओं को कम करने के बावजूद अपना डिपॉजिट बेस बनाए रख पाता है या नहीं।
