पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने बोर्ड से $1.5 बिलियन तक विदेशी मुद्रा बॉन्ड जारी करने की मंजूरी पा ली है। यह पैसा बैंक अपनी GIFT सिटी स्थित IFSC यूनिट के जरिए जुटाएगा, जिसका मकसद अपने बिजनेस का विस्तार करना है। बैंक को उम्मीद है कि इस फाइनेंशियल ईयर में उसका सालाना मुनाफा ₹20,000 करोड़ के पार निकल जाएगा।
PNB बढ़ाएगा विदेशी मुद्रा भंडार
सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने बोर्ड से $1.5 बिलियन तक का फंड विदेशी मुद्रा बॉन्ड (foreign currency bonds) के जरिए जुटाने की मंजूरी हासिल कर ली है। यह पैसा बैंक अपनी इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) बैंकिंग यूनिट, जो GIFT सिटी में स्थित है, के माध्यम से जुटाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और बढ़ते लोन बुक को सपोर्ट करना है।
₹20,000 करोड़ के मुनाफे का लक्ष्य
बैंक के मैनेजमेंट ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए काफी उम्मीद भरा अनुमान पेश किया है। उनका मानना है कि बैंक का नेट प्रॉफिट इस बार ₹20,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा। पिछले फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही से बैंक लगातार हर तिमाही में ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का नेट प्रॉफिट दर्ज कर रहा है, जो इस लक्ष्य को हासिल करने का आत्मविश्वास देता है। इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए PNB रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) जैसे सेक्टर्स पर फोकस कर रहा है। मैनेजमेंट ने इस साल लोन ग्रोथ 12-13% और डिपॉजिट ग्रोथ 9-10% रहने का अनुमान लगाया है।
नए सेगमेंट में एंट्री की तैयारी
लोन देने के पारंपरिक कारोबार के अलावा, PNB अब एक्विजिशन फाइनेंस (acquisition finance) मार्केट में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है। यह एक ऐसा सेगमेंट है जहां बैंक कॉर्पोरेट अधिग्रहण के लिए फाइनेंसिंग प्रदान करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में ऐसे सौदों के लिए अधिक लेंडिंग लिमिट की अनुमति देने के बाद, PNB अपनी यह सेवाएं तीसरी तिमाही से शुरू करने की योजना बना रहा है। इस नए सेगमेंट में उतरकर बैंक अपने एसेट पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई (diversify) करना चाहता है, और शुरुआत में डोमेस्टिक कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशकों की नजरें अब इस बॉन्ड इश्यू की टाइमिंग और लागत पर रहेंगी। विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने पर ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और करेंसी रिस्क का भी असर पड़ता है। यह देखना अहम होगा कि PNB नए सेगमेंट जैसे एक्विजिशन फाइनेंस में विस्तार करते हुए अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रख पाता है। साथ ही, बैंक अपने लोन और डिपॉजिट ग्रोथ के लक्ष्यों को हासिल करने में कितना सफल रहता है, यह भी उसकी एसेट क्रिएशन स्ट्रैटेजी के इवैल्यूएशन के लिए महत्वपूर्ण होगा। इन ग्रोथ प्लान्स का एक्जीक्यूशन और बॉन्ड इश्यू से जुड़ी टाइमलाइन पर कोई भी अपडेट निवेशकों के लिए अगले बड़े डेवलपमेंट होंगे।
