RBI द्वारा रेपो रेट को **5.50%** तक बढ़ाए जाने के बाद सरकारी बैंकों में बदलाव का दौर जारी है। Punjab National Bank और Indian Bank ने अपने लेंडिंग रेट्स (MCLR) बढ़ा दिए हैं, जबकि Bank of India ग्राहकों को लुभाने के लिए डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज दे रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को 5.50% करने के बाद अब सरकारी बैंकों पर दबाव बढ़ गया है। लेंडर्स अब अपनी ब्याज दरें री-कैलिब्रेट कर रहे हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।\n\n### कर्ज हुआ महंगा\n\nPunjab National Bank और Indian Bank ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR) में सभी टेनर्स के लिए 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है। जो ग्राहक पर्सनल, ऑटो या होम लोन ले रखे हैं, उनकी ईएमआई (EMI) पर अब बोझ बढ़ना तय है। इस बदलाव के बाद, Punjab National Bank का एक साल का MCLR अब 8.90% हो गया है, और Indian Bank के नए रेट्स 3 नवंबर, 2026 से लागू हो गए हैं।\n\n### डिपॉजिट पर धमाका\n\nएक तरफ जहां कर्ज महंगा हो रहा है, वहीं Bank of India ने ग्राहकों के लिए 500 दिन की खास 'Star Akshay' फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम पेश की है। बैंक आम ग्राहकों को 6.85% और सुपर सीनियर सिटीजन्स को 7.50% तक का रिटर्न दे रहा है। बैंक का पूरा जोर फिलहाल ज्यादा से ज्यादा रिटेल फंड्स जुटाने पर है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\n\nबैंकिंग सेक्टर में अब 'वॉर फॉर डिपॉजिट्स' छिड़ गई है। बैंकों के सामने चुनौती यह है कि वे कैसे अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को सुरक्षित रखें। यदि बैंक इन बढ़ती लागतों को पूरी तरह से ग्राहकों पर डाल देते हैं, तो क्रेडिट डिमांड सुस्त हो सकती है। आने वाली तिमाही में यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक अपनी प्रॉफिटेबिलिटी और लोन ग्रोथ के बीच कैसा तालमेल बिठाते हैं।
