सितंबर 2026 में इंडिया की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) इंडस्ट्री में जबरदस्त हलचल देखी गई। बाजार में आई गिरावट के बीच हाई-नेट-वर्थ इन्वेस्टर्स ने सुरक्षित ठिकाने की तलाश में अपना पैसा डेट (Debt) स्ट्रेटेजीज में लगाना शुरू कर दिया है, जिससे नेट इनफ्लो तीन गुना बढ़कर ₹8,924 करोड़ पहुंच गया है।
सितंबर 2026 में PMS इंडस्ट्री ने एक बड़ा बदलाव देखा। भले ही शेयर बाजार दबाव में थे और BSE Sensex और NSE Nifty में क्रमशः 5.8% और 6.1% की गिरावट आई, लेकिन इसके बावजूद PMS इंडस्ट्री में पैसा जमकर आया। इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब रिकॉर्ड ₹44.41 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जो साफ दिखाता है कि इन्वेस्टर अब जोखिम कम करने पर जोर दे रहे हैं।
डेट (Debt) की तरफ निवेशकों का रुझान
इन्वेस्टर्स अब अपनी कैपिटल को सुरक्षित रखने के लिए फिक्स्ड-इनकम विकल्पों को चुन रहे हैं। यही वजह है कि कुल एसेट बेस में डेट इंस्ट्रूमेंट्स की हिस्सेदारी अब 83% से ज्यादा हो गई है। यह बदलाव बताता है कि बाजार की वोलेटिलिटी से बचने के लिए लोग इक्विटी से निकलकर मैनेज्ड डेट प्रोडक्ट्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
डिस्क्रीशनरी (Discretionary) सेगमेंट का जलवा
इस ग्रोथ में डिस्क्रीशनरी PMS का सबसे बड़ा हाथ रहा है, जिसने ₹7,274 करोड़ का नेट इनफ्लो हासिल किया। अगर हम EPFO-लिंक्ड बड़े मैंडेट्स को हटा भी दें, तब भी डिस्क्रीशनरी इनफ्लो पिछले महीने के मुकाबले दोगुना होकर ₹3,224 करोड़ रहा। यह लगातार दूसरा महीना है जब निवेशकों ने भारी उठापटक के बीच अपना पोर्टफोलियो रिबैलेंस किया है।
SEBI के नए नियमों का असर
मार्केट रेगुलेटर SEBI के हालिया नियमों ने भी इस इंडस्ट्री को नई रफ्तार दी है। अब फंड मैनेजर्स क्लाइंट के एसेट्स का 10% तक हिस्सा अनलिस्टेड इन्वेस्टमेंट-ग्रेड डेट में लगा सकते हैं। इससे उन्हें लिस्टेड बॉन्ड मार्केट से इतर बेहतर रिटर्न के मौके मिल रहे हैं। 'एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया' को उम्मीद है कि डिजिटल ऑनबोर्डिंग और इन नए नियमों की वजह से आने वाले 3-4 सालों में क्लाइंट बेस 2 लाख से बढ़कर 10 लाख तक पहुंच सकता है।
