PM Jan Dhan Yojana: 12 साल का सफर, **59 करोड़** खाते और **₹3.17 लाख करोड़** की जमा पूंजी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PM Jan Dhan Yojana: 12 साल का सफर, **59 करोड़** खाते और **₹3.17 लाख करोड़** की जमा पूंजी

भारत के फाइनेंशियल इंक्लूजन मिशन 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' ने 12 साल पूरे कर लिए हैं। इस योजना के तहत अब तक **59 करोड़** से ज्यादा बैंक खाते खुल चुके हैं और लोगों ने **₹3.17 लाख करोड़** जमा किए हैं।

28 अगस्त, 2014 को शुरू हुई 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' (PMJDY) ने अगस्त 2026 तक 12 साल का लंबा सफर तय कर लिया है। इस सरकारी पहल ने करोड़ों लोगों को फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 19 अगस्त 2026 तक इन खातों में कुल जमा राशि ₹3.17 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।

ग्रामीण भारत की भागीदारी

इस योजना की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 78% खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से हैं। वहीं, महिला खाताधारकों की हिस्सेदारी 56% है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रति खाता औसत जमा राशि बढ़कर ₹5,356 हो गई है, जो स्कीम की शुरुआत की तुलना में 3.4 गुना अधिक है। यह दिखाता है कि लोग अब केवल खाता नहीं खोल रहे, बल्कि बचत की आदत भी डाल रहे हैं।

बैंकों के लिए क्या है फायदा?

कमर्शियल बैंकों के लिए यह योजना कम लागत वाली पूंजी (low-cost capital) का बड़ा जरिया बनी है। इससे बैंकों को एक ऐसा डिपॉजिट बेस मिला है, जो महंगे टर्म डिपॉजिट के मुकाबले काफी सस्ता है। इसके अलावा, 41 करोड़ से ज्यादा RuPay डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। बैंकों के लिए अब मौका है कि वे इस बेस का इस्तेमाल माइक्रो-इंश्योरेंस, पेंशन स्कीम और 'मुद्रा लोन' जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को क्रॉस-सेल करने के लिए करें।

सुरक्षा और चुनौतियां

तेजी से बढ़ते खातों के साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। बैंकिंग सेक्टर के सामने 'म्यूल अकाउंट्स' (mule accounts) की बड़ी चुनौती है, जिनका इस्तेमाल अवैध पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए किया जा सकता है। इससे बचने के लिए बैंक अब AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा, खातों की निष्क्रियता (dormancy) भी एक समस्या बनी हुई है, जिसे कम करने के लिए बैंकों को लगातार निवेश करना पड़ रहा है।

अब सरकार का ध्यान 'अकाउंट पेनिट्रेशन' से हटकर 'सर्विस यूटिलिटी' पर है। भविष्य में 'यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस' (ULI) के जरिए इन खाताधारकों को इंस्टेंट क्रेडिट देने की तैयारी है, बशर्ते डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत रखा जाए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.