पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) जल्द ही 'NPS स्वास्थ्य' नाम की एक नई स्कीम लॉन्च करने जा रही है। यह स्कीम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को हेल्थ इंश्योरेंस से जोड़ेगी, ताकि रिटायरमेंट के बाद बढ़ती मेडिकल ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।
क्या है 'NPS स्वास्थ्य' स्कीम?
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के सब्सक्राइबर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड प्रोडक्ट 'NPS स्वास्थ्य' लॉन्च करने की तैयारी में है। PFRDA के चेयरमैन एस. रामन के अनुसार, यह नई स्कीम अगले 60 से 70 दिनों में लॉन्च हो सकती है, जैसे ही टेक्निकल इंटीग्रेशन का काम पूरा हो जाएगा। इसका मुख्य मकसद रिटायरमेंट के बाद बढ़ती मेडिकल लागतों से निपटने के लिए सब्सक्राइबर्स को एक अलग फंड बनाने में मदद करना है। यह फंड मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के अतिरिक्त एक सपोर्ट के तौर पर काम करेगा।
क्यों पड़ी इस स्कीम की ज़रूरत?
भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन (Medical Inflation) लगातार बढ़ रहा है, जिसका सबसे ज़्यादा असर रिटायर हो चुके लोगों पर पड़ता है, क्योंकि उनकी नियमित आमदनी कम हो जाती है। NPS ने लॉन्ग-टर्म वेल्थ बनाने में अच्छी सफलता पाई है, लेकिन इसमें रिटायरमेंट के बाद स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों के लिए पैसे बचाने का कोई खास फीचर नहीं था। हेल्थ इंश्योरेंस को पेंशन स्ट्रक्चर के साथ जोड़कर, रेगुलेटर का लक्ष्य सब्सक्राइबर्स को वर्किंग इयर्स के दौरान ही मेडिकल खर्चों की प्लानिंग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
कैसे काम करेगी यह स्कीम?
'NPS स्वास्थ्य' स्कीम सभी NPS सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध होगी, चाहे वे सरकारी कर्मचारी हों, प्राइवेट सेक्टर में काम करते हों या वॉलंटरी तौर पर सिस्टम से जुड़े हों। शुरुआत में, यह एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' मॉडल के तौर पर लॉन्च होगी, जिसमें एक पेंशन फंड, एक सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) और एक हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर (HBA) शामिल होंगे। Aditya Birla Health Insurance इस इनिशिएटिव के साथ पार्टनरशिप करने वाला पहला इंश्योरर होगा। भविष्य में, जैसे-जैसे स्कीम बढ़ेगी, इसमें और भी इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स को जोड़ा जा सकता है।
पारदर्शिता और रेगुलेटरी ढाँचा
सब्सक्राइबर्स का भरोसा बनाए रखने के लिए, PFRDA ने स्पष्ट किया है कि सभी खर्चे, जैसे एडमिनिस्ट्रेटिव फीस और हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर के चार्जेज़, मौजूदा मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत ही होंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी फी स्ट्रक्चर ट्रांसपेरेंट हों। हालांकि, कंट्रीब्यूशन की लिमिट, प्रीमियम कैलकुलेशन और मेडिकल ज़रूरतों के लिए फंड निकालने के नियम अभी फाइनल नहीं हुए हैं, लेकिन उम्मीद है कि ये लॉन्च डेट के करीब घोषित किए जाएंगे।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
यह इनिशिएटिव अभी शुरुआती दौर में है। निवेशकों और सब्सक्राइबर्स को PFRDA से आने वाले ऑफिशियल सर्कुलर का इंतज़ार करना चाहिए, जिसमें सटीक प्रीमियम स्ट्रक्चर और कंट्रीब्यूशन रूल्स की जानकारी होगी। गौर करने वाली मुख्य बातें होंगी: पैनल में शामिल इंश्योरेंस कंपनियों की फाइनल लिस्ट, सब्सक्राइबर्स के लिए ऑप्ट-इन या ऑप्ट-आउट की फ्लेक्सिबिलिटी और 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' फेज का परफॉरमेंस। NPS इकोसिस्टम में इंश्योरेंस सर्विसेज का इंटीग्रेशन, मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स और पेंशन फंड मैनेजर्स के बिजनेस पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि ज़्यादा सब्सक्राइबर्स इन कंबाइंड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को अपनाएंगे।
