PFRDA ने सभी National Pension System स्कीम्स के लिए एक नया और स्टैंडर्ड क्लासिफिकेशन फ्रेमवर्क जारी किया है, जो अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। इस नियम के तहत पेंशन फंड्स को अपनी स्कीम्स को पांच अलग-अलग कैटेगरीज में बांटना होगा और 'Risk-o-meter' का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।
स्कीमों की नई कैटेगरीज और इक्विटी एक्सपोजर
अब से NPS निवेश के विकल्पों को पांच स्पष्ट समूहों में बांटा गया है: लाइफसाइकिल-बेस्ड स्कीम्स, एक्टिव चॉइस, NPS संचय, रेगुलेशन 4A स्कीम्स और मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF)। MSF के तहत आने वाली स्कीम्स को अब A से E तक की कैटेगरीज में वर्गीकृत किया जाएगा।
इसमें कैटेगरी A उन स्कीम्स के लिए है जिनमें 80-100% इक्विटी एक्सपोजर है, जो सबसे ज्यादा रिस्की हैं। वहीं, कैटेगरी E उन स्कीम्स के लिए है जिनमें इक्विटी एक्सपोजर सिर्फ 0-10% है, यानी ये सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाएंगे।
पारदर्शिता और सख्ती
सिर्फ नाम ही नहीं, अब हर स्कीम को 'Risk-o-meter' दिखाना होगा, जो निवेशकों को यह समझने में मदद करेगा कि उनके पैसे पर कितना रिस्क है। साथ ही, 'NPS स्कीम एसेंशियल्स' नाम का एक स्टैंडर्ड डॉक्यूमेंट भी अनिवार्य किया गया है।
अनुपालन की समय-सीमा
रेगुलेटर ने पेंशन फंड्स को इन नियमों को लागू करने के लिए 30 से 45 दिन का समय दिया है। यदि किसी फंड मैनेजर के पास एक ही कैटेगरी में 2 से ज्यादा स्कीम्स हैं, तो उन्हें उन्हें मर्ज या रिस्ट्रक्चर करना होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य फालतू और कन्फ्यूज करने वाली स्कीम्स को कम करना है। ध्यान रहे, सरकारी सेक्टर के NPS अकाउंट्स इस बदलाव से बाहर रखे गए हैं और उन पर पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
